देहरादून। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त अजय के. मेहरा ने कहा कि उत्तराखंड में ईपीएफओ लगातार अपनी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और सदस्य-केंद्रित बना रहा है। राज्य में वर्तमान में 9,744 अंशदायी प्रतिष्ठान और 7.74 लाख से अधिक अंशदायी सदस्य ईपीएफओ से जुड़े हैं तथा सभी दावों का समयबद्ध निस्तारण किया जा रहा है। उन्होंने देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए यहां विकसित ‘संवेदना’ सेल को पूरे जोन में लागू करने की घोषणा की।
देहरादून स्थित ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अजय के. मेहरा ने बताया कि उत्तराखंड में 9,744 अंशदायी प्रतिष्ठानों के माध्यम से 7,74,377 सदस्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय कार्यालय हितधारकों को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार नवाचार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि देहरादून कार्यालय द्वारा शुरू किया गया ‘संवेदना’ सेल मृत्यु दावों के त्वरित, संवेदनशील और त्रुटिरहित निस्तारण की एक प्रभावी पहल है। इस मॉडल की सफलता को देखते हुए अब इसे दिल्ली, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जोन के अन्य कार्यालयों में भी लागू किया जाएगा, ताकि लाभार्थियों को बिना अनावश्यक देरी के पारदर्शी सेवाएं मिल सकें।
अजय के. मेहरा ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) की जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। करीब ₹99,446 करोड़ की इस योजना के माध्यम से देशभर में दो वर्षों के दौरान 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने का अनुमान है। इनमें लगभग 1.92 करोड़ ऐसे युवा शामिल होंगे, जो पहली बार औपचारिक रोजगार क्षेत्र का हिस्सा बनेंगे। यह योजना 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित रोजगारों पर लागू होगी और विनिर्माण क्षेत्र के लिए विशेष प्रोत्साहन का भी प्रावधान है।
उन्होंने ईपीएफ आंशिक निकासी नियमों में किए गए बड़े बदलावों की भी जानकारी दी। अब 13 अलग-अलग प्रावधानों को सरल बनाकर तीन श्रेणियों, आवश्यक जरूरतें, आवास संबंधी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां में समाहित किया गया है। नए नियमों के तहत शिक्षा के लिए 10 बार और विवाह के लिए 5 बार आंशिक निकासी की सुविधा मिलेगी। साथ ही अधिकांश मामलों में न्यूनतम सेवा अवधि घटाकर 12 माह कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इन बदलावों का उद्देश्य सदस्यों को अधिक सुविधा देने के साथ-साथ उनके सेवानिवृत्ति कोष को भी सुरक्षित बनाए रखना है।
डिजिटल सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि CITES (Centralised IT Enabled System) के माध्यम से ईपीएफओ अपनी सेवाओं को और अधिक तकनीक आधारित बना रहा है। इससे दावों के निस्तारण में तेजी आएगी, शिकायतों का समयबद्ध समाधान होगा और लंबित मामलों के निपटारे में भी मदद मिलेगी।
इस अवसर पर वेल्हम बॉयज़ स्कूल, देहरादून के कई वर्षों से लंबित EDLI Exemption प्रकरण का भी सफल निस्तारण किया गया। अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने विद्यालय की प्राचार्य संगीता कैन को औपचारिक रूप से EDLI Exemption Order प्रदान किया।
प्रेस वार्ता में क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-प्रथम विजय विक्रम बहादुर सिंह, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-द्वितीय उदित साह, मोहम्मद जैद, सहायक भविष्य निधि आयुक्त संतोष कुमार तथा राजेश कुमार भी उपस्थित रहे।






