Thursday, July 23, 2026
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दिल्ली विधानसभा चुनावः उत्तराखंड मूल के आठ प्रत्याशी मैदान में उतरे, दो के सिर सजा जीत का सेहरा

नई दिल्ली/देहरादून। दिल्ली विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड मूल के आठ प्रत्याशियों ने भी अपना दमखम दिखाने के लिए चुनावी मैदान में ताल ठोकी थी। हालांकि इनमें से ज्यादातर को करारी हार झेलनी पड़ी है। केवल दो प्रत्याशियों को ही जीत मिली है। वहीं, बाकि सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। कुछ प्रत्याशियों को तो नोटा से भी कम वोट मिले हैं।

दिल्ली में उत्तराखंड के लोग बड़ी तादाद में रहते हैं। यहां करीब 18 लाख से ज्यादा उत्तराखंड मूल के वोटर हैं। कई विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां उत्तराखंड के मूल के लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। विशेषकर नई दिल्ली, आरकेपुरम, तिमारपुर, कस्तूरबानगर, बदरपुर, संगम विहार, देवली, पालम, द्वारका, किराड़ी, बुराड़ी, घोंडा, करावल नगर और पटपड़गंज में उत्तराखंड मूल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। इसके अलावा लक्ष्मी नगर, त्रिलोकपुरी, शाहदरा, सीमापुरी, रोहिणी, छतरपुर और महरौली विधानसभा सीटों में भी उत्तराखंडी मतदाताओं की संख्या काफी है। ऐसे में उत्तराखंडी मूल के प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में थे।

लगातार छठवीं बार विधायक बने मोहन सिंह बिष्ट

मोहन सिंह बिष्ट करवाल नगर सीट से लगातार पांच बार विधायक रहे हैं। इस बार भाजपा ने उनकी जगह कपिल मिश्रा को करावल नगर से प्रत्याशी बनाया। मोहन सिंह बिष्ट को मुस्तफाबाद से प्रत्याशी बनाया गया, जिसको लेकर उन्होंने नाराजगी भी जताई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के मनाने के बाद उन्होंने मुस्तफाबाद से चुनाव लड़ा और यहां से भी जीत हासिल कर लगातार छठवीं बार विधानसभा पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया है। मोहन सिंह बिष्ट ने आम आदमी पार्टी के अदील अहमद खान को 17 हजार पांच सौ 78 वोटों के बड़े अंतर शिकस्त दी।

पार्षद से पहली बार विधायक बने रविंद्र सिंह नेगी

भाजपा ने विनोद नगर के मौजूदा पार्षद रविंद्र सिंह नेगी को बहुत ही महत्वपूर्ण सीट पटपड़गंज से प्रत्याशी बनाया। पटपड़गंज से पहले आम आदमी पार्टी के बड़े नेता और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया चुनाव लड़ते रहे। लेकिन इस बार आप ने यहां से कोचिंग सेंटर चलाने वाले अवध ओझा को प्रत्याशी बनाया था। कांग्रेस ने भी इस सीट पर पूरा जोर लगाया था और पूर्व विधायक व प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी को प्रत्याशी बनाकर उतारा था। हालांकि रविंद्र सिंह नेगी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 28 हजार 72 वोटों के अंतर से बड़ी जीत हासिल की। रविंद्र सिंह नेगी उस समय अचानक से चर्चा में आए थे, जब एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर तीन बार उनके पैर छुए थे। वह बागेश्वर के रहने वाले हैं, जिनके प्रति पीएम मोदी की अगाध आस्था है। यही कारण है कि जब पीएम मोदी को इसका पता चला तो उन्होंने तीन बार उनके पैर छुए।

तीसरे स्थान पर रहे प्रेम बल्लभ

कांग्रेस ने हरिनगर से प्रेम बल्लभ (प्रेम शर्मा) को प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा था। इस सीट पर भाजपा के श्याम शर्मा ने आप के सुरेंद्र कुमार सेतिया को छह हजार छह सौ 32 वोटों के अंतर से शिकस्त दी। कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमबल्लभ को कुल चार हजार दो सौ 52 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।

महरौली से चुनाव मैदान में उतरे योगेश्वर सिंह बिष्ट, महावीर सिंह

उत्तराखंडी मूल के योगेश्वर सिंह बिष्ट ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर महरौली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। भाजपा युवा मोर्चा के पदाधिकारी रहे योगेश्वर ने टिकट न मिलने पर भाजपा से बगावत की और बसपा ने उन्हें टिकट देकर मैदान में उतारा। हालांकि वह पांचवें स्थान पर रहे और उन्हें नोटा से भी कम केवल 778 वोट मिले। इसी सीट पर एक और उत्तराखंडी महावीर सिंह ने भी मातृभूमि सेवा पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और वह छठवें स्थान पर रहे। उन्हें केवल 181 वोट मिले।

करावल सीट से उतरे अजय सिंह नेगी पांचवें स्थान पर

इसके अलावा करावल नगर सीट से अजय सिंह नेगी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे। वह इस सीट पर पांचवें स्थान पर रहे और उन्हें कुल एक हजार छह वोट मिले। हालांकि वह नोटा से ज्यादा वोट लाने में कामयाब रहे।

नोटा से भी कम वोट लाए सुधीर नेगी और बचन राम

संगम विहार से सुधीर नेगी ने भी निर्दलीय प्रत्य़ाशी के तौर पर चुनाव लड़ा। वह इस सीट पर छठवें स्थान पर रहे और उन्हें नोटा से भी कम कुल 143 वोटों से ही संतोष करना पड़ा। देवली (सुरक्षित) सीट से उत्तराखंडी मूल के बचन राम ने भी ताल ठोकी थी। वह इस सीट पर छठवें स्थान पर रहे और उन्हें नोटा से भी कम कुल 947 वोट मिले हैं।

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