Wednesday, June 24, 2026
Home आर्टिकल हल्द्वानी हिंसा का दोषी कौन?

हल्द्वानी हिंसा का दोषी कौन?

अजय दीक्षित
गत वृहस्पतिवार 8 फरवरी को तथाकथित एक अवैध मदरसे को तोडऩे के बाद जिस पैमाने पर हल्द्वानी में हिंसा हुई, वह बहुत चिंता का विषय है । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को बुलडोजर मुख्यमंत्री के रूप में जाना जाता है । हल्द्वानी नैनीताल जिले का हिस्सा है । नैनीताल पहाड़ी इलाक़ा है, पर हल्द्वानी मैदानी इलाका है । सन् 1947 के भारत विभाजन के बाद बड़े पैमाने पर सिख यहां आकर बस गये । वहां उनके बहुत बड़े फॉर्म हैं । इन फार्मों में अब तो ज्यादातर काम मशीनों से होता है, पर कुछ समय पहले तक सब काम ‘मैन्युअल” था अर्थात, आदमी काम करते थे । हल्द्वानी में मुस्लिम आबादी बहुत ज्यादा नहीं है । इनका यहां कोई पुस्तैनी धंधा भी नहीं है । जब पीतल के बर्तन इस्तेमाल होते थे, तो कुछ मुसलमान कलई करने का काम करते थे । यहां के कुछ मुसलमान चूड़ी पहनाने का काम करते थे । अब भी कुछ करते होंगे । हिन्दू स्त्रियां इन्हीं से चूड़ी पहनती थी । अच्छा भाईचारा था । बड़ी उम्र की हिन्दू महिलाओं को ये चूड़ीदार खाला कहकर आदर देते हैं । अन्य कम उम्र की हिन्दू महिलाओं के लिए ‘बहना’ या अन्य आदर सूचक शब्दों का प्रयोग करते थे या हैं । कम उम्र की लड़कियां जब इनसे चूड़ी पहनती हैं तो उन्हें ‘चाचा जान’ कहती थी । अब भी कहती होंगी।

लखनऊ या देहरादून में बैठे राजनैतिक आका (उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के चयनित मुख्यमंत्री व अन्य मंत्री गण) शायद इस भाईचारे को जानते नहीं । प्रशासनिक अधिकारियों की मजबूरी है कि उन्हें ऊपर से प्राप्त आदेश का पालन करना होता है । टी.वी.में दिखलाया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इन दंगाइयों को गोली मारने के आदेश दिये हैं । हल्द्वानी उत्तराखण्ड में है । शायद वहां के मुख्यमंत्री ने भी ऐसा ही आदेश दे दिया होगा ।

असल में हल्द्वानी बरेली और मुरादाबाद से सटा हुआ है । अवैध निर्माण को तोडऩा है या हटाना पूरी तरह से जायज है । नैनीताल की महिला डीएम ने कहा है कि यह मदरसा कोर्ट के आदेश से तोड़ा गया है । अच्छा होता कि मुस्लिम नेताओं को विश्वास में लेकर यह कार्य भाई की जानी चाहिये थी। फिर बृहस्पतिवार का दिन ठीक नहीं था । शुक्रवार को जुम्मे की नमाज होती है यहां उस क्षेत्र के सभी इस्लाम धर्मी इक्कठा  होते हैं । यह आशंका बनी रहती है कि कुछ सिरफिरे आम मुसलमान को भडक़ा दें ।

आम आदमी (चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का हो) आज बेरोजगारी, महंगाई और कपट से जूझ रहा है । युवाओं को कोई रोजगार नहीं है । यूं भी मुस्लिम युवाओं का भविष्य अंधकार में है । जिस तरह से देश में आजकल रामराज्य की बात चल रही है, उससे अल्पसंख्यक भयभीत है । नारा है अभी तो अयोध्या है काशी और मथुरा बाकी है । हम चाहते हैं कि देश में भाईचारा बना रहे । अमन चैन रहे । अभी भी हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री पहल करें और सभी अल्पसंख्यक धर्मावलम्बी को विश्वास दिलाएं कि सरकारों की नजऱ में सभी बराबर हैं और यह देश हिन्दू राष्ट्र नहीं है । यह भारत का राष्ट्र है और हम सभी पहले भारतीय हैं । फिर किसी और धर्म सम्प्रदाय के अनुयायी । दैनिक अजय भारत की ओर से अजय दीक्षित प्रधान संपादक सभी से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं ।

RELATED ARTICLES

जाम में जकड़ा उत्तराखंड: बड़े शहरों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर जाम की समस्या बनी नासूर

अनिल चन्दोला देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या...

पुरानी चुनौतियों के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ाएगी चारधाम यात्रा की परेशानी, असमंजस में व्यवसायी

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू में अब चंद दिन ही बाकी हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं...

उत्तराखंड में सालभर रूठी रही प्रकृति, 260 से ज्यादा की मौत, कई अब तक लापता, करोड़ों का नुकसान

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड के लिए यह साल आपदा के दृष्टिकोण से बेहद मनहूस साबित हो रहा है। सितंबर आधा बीतने के बावजूद तेज बारिश...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

विकसित भारत रोजगार योजना से रोजगार पाने और देने वालों को मिल रहा फायदा, 19 जून को राष्ट्रीय कार्यक्रम

देहरादून। देश में रोजगार सृजन को गति देने और युवाओं को औपचारिक क्षेत्र से जोड़ने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री विकसित...

11 साल बाद खुला किसाऊ बांध परियोजना का रास्ता, उत्तराखंड-हिमाचल समेत छह राज्यों को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली। उत्तर भारत की बहुप्रतीक्षित किसाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को लेकर वर्षों से चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया है। विभिन्न कारणों से...

जाम में जकड़ा उत्तराखंड: बड़े शहरों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर जाम की समस्या बनी नासूर

अनिल चन्दोला देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या...

एसडीजी में उत्तराखंड की बड़ी छलांग, देशभर में 10वें से पहले स्थान पर पहुंचा, जिलों में रुद्रप्रयाग अव्वल

देहरादून। उत्तराखंड ने नीति आयोग के एसडीजी (Sustainable Development Goals) इंडिया इंडेक्स में बड़ी छलांग लगाई है। पिछली रैंकिग में 10वें स्थान पर रहा...

Recent Comments