Monday, June 22, 2026
Home आर्टिकल म्यांमार सीमा पर चुनौती

म्यांमार सीमा पर चुनौती

इस बीच म्यांमार के अंदर की घटनाएं और भी ज्यादा चिंता का कारण बन रही हैं। म्यांमार के कई हिस्सों में विद्रोह से जूझ रहे सैन्य शासन के लिए नई चुनौतियां पेश आ रही हैं। इससे भारत की सीमाई चुनौती ज्यादा गंभीर हुई है।

यह खबर भारत के लिए चिंताजनक है कि म्यांमार के पश्चिमी रखाइन प्रांत में सक्रिय एक नस्लीय हथियारबंद गुट ने भारत-बांग्लादेश सीमा के पास एक शहर पर कब्जा कर लिया है। सशस्त्र समूह अराकान आर्मी ने यह दावा किया है। इस गुट ने जिस शहर को कब्जा करने का दावा किया है उसका नाम पालतेवा है। म्यांमार से लगी सीमा पहले से भारत के लिए सिरदर्द बनी हुई है। मणिपुर में जारी हिंसा के क्रम में इसकी चर्चा हुई है। बल्कि यह खबर भी आई थी कि भारत सरकार ने म्यांमार से लगी सीमा पर बाड़ लगाने का फैसला किया है। लेकिन उसका मिजोरम सरकार ने जोरदार विरोध किया है। सीमाई इलाकों में आर-पार समान जनजातीय समुदाय रहते हैं, जिनके बीच आपसी रिश्ते हैं। ये लोग सीमा को पार कर एक से दूसरी तरफ आते-जाते रहते हैं। इसलिए 1970 के दशक से भारत ने वहां इस मामले में उदार नीति अपना रखी है। लेकिन अब उस पर पुनर्विचार हो रहा है।

इस बीच म्यांमार के अंदर की घटनाएं और भी ज्यादा चिंता का कारण बन रही हैं। म्यांमार के कई हिस्सों में विद्रोह से जूझ रहे सैन्य शासन के लिए नई चुनौतियां पेश आ रही हैं। हाल में म्यांमार में सैनिक शासन विरोधी गुटों ने कई सैन्य चौकियों और कस्बों पर नियंत्रण कर लिया है। ताजा घटना भी उसी सिलसिले से जुड़ी हुई है। अराकान आर्मी के एक प्रवक्ता ने कहा कि उसने पालतेवा शहर पर कब्जा कर लिया है। कलादान नदी के तट पर स्थित यह शहर पड़ोसी देशों के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग है। अराकान सेना का दावा है कि उसके पास लगभग 30,000 हथियारबंद लोग हैं और यह सरकार विरोधी त्रिपक्षीय ब्रदरहुड अलायंस का हिस्सा हैं। इस घटना से सीमाई इलाकों में एक नई परिस्थिति बनेगी। विद्रोही गुटों ने कुछ समय पहले चीन की सीमा से लगे एक प्रांत पर कब्जा कर लिया था। तब चीन ने मध्यस्थता की। नतीजतन, विद्रोही गुट और सैन्य शासन के बीच एक करार हुआ। इस तरह चीन ने अपने सुरक्षा हितों की रक्षा की। क्या भारत को भी ऐसी पहल नहीं करनी चाहिए?

RELATED ARTICLES

जाम में जकड़ा उत्तराखंड: बड़े शहरों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर जाम की समस्या बनी नासूर

अनिल चन्दोला देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या...

पुरानी चुनौतियों के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ाएगी चारधाम यात्रा की परेशानी, असमंजस में व्यवसायी

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू में अब चंद दिन ही बाकी हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं...

उत्तराखंड में सालभर रूठी रही प्रकृति, 260 से ज्यादा की मौत, कई अब तक लापता, करोड़ों का नुकसान

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड के लिए यह साल आपदा के दृष्टिकोण से बेहद मनहूस साबित हो रहा है। सितंबर आधा बीतने के बावजूद तेज बारिश...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

विकसित भारत रोजगार योजना से रोजगार पाने और देने वालों को मिल रहा फायदा, 19 जून को राष्ट्रीय कार्यक्रम

देहरादून। देश में रोजगार सृजन को गति देने और युवाओं को औपचारिक क्षेत्र से जोड़ने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री विकसित...

11 साल बाद खुला किसाऊ बांध परियोजना का रास्ता, उत्तराखंड-हिमाचल समेत छह राज्यों को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली। उत्तर भारत की बहुप्रतीक्षित किसाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को लेकर वर्षों से चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया है। विभिन्न कारणों से...

जाम में जकड़ा उत्तराखंड: बड़े शहरों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर जाम की समस्या बनी नासूर

अनिल चन्दोला देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या...

एसडीजी में उत्तराखंड की बड़ी छलांग, देशभर में 10वें से पहले स्थान पर पहुंचा, जिलों में रुद्रप्रयाग अव्वल

देहरादून। उत्तराखंड ने नीति आयोग के एसडीजी (Sustainable Development Goals) इंडिया इंडेक्स में बड़ी छलांग लगाई है। पिछली रैंकिग में 10वें स्थान पर रहा...

Recent Comments