Sunday, September 6, 2026
Home आर्टिकल म्यांमार सीमा पर चुनौती

म्यांमार सीमा पर चुनौती

इस बीच म्यांमार के अंदर की घटनाएं और भी ज्यादा चिंता का कारण बन रही हैं। म्यांमार के कई हिस्सों में विद्रोह से जूझ रहे सैन्य शासन के लिए नई चुनौतियां पेश आ रही हैं। इससे भारत की सीमाई चुनौती ज्यादा गंभीर हुई है।

यह खबर भारत के लिए चिंताजनक है कि म्यांमार के पश्चिमी रखाइन प्रांत में सक्रिय एक नस्लीय हथियारबंद गुट ने भारत-बांग्लादेश सीमा के पास एक शहर पर कब्जा कर लिया है। सशस्त्र समूह अराकान आर्मी ने यह दावा किया है। इस गुट ने जिस शहर को कब्जा करने का दावा किया है उसका नाम पालतेवा है। म्यांमार से लगी सीमा पहले से भारत के लिए सिरदर्द बनी हुई है। मणिपुर में जारी हिंसा के क्रम में इसकी चर्चा हुई है। बल्कि यह खबर भी आई थी कि भारत सरकार ने म्यांमार से लगी सीमा पर बाड़ लगाने का फैसला किया है। लेकिन उसका मिजोरम सरकार ने जोरदार विरोध किया है। सीमाई इलाकों में आर-पार समान जनजातीय समुदाय रहते हैं, जिनके बीच आपसी रिश्ते हैं। ये लोग सीमा को पार कर एक से दूसरी तरफ आते-जाते रहते हैं। इसलिए 1970 के दशक से भारत ने वहां इस मामले में उदार नीति अपना रखी है। लेकिन अब उस पर पुनर्विचार हो रहा है।

इस बीच म्यांमार के अंदर की घटनाएं और भी ज्यादा चिंता का कारण बन रही हैं। म्यांमार के कई हिस्सों में विद्रोह से जूझ रहे सैन्य शासन के लिए नई चुनौतियां पेश आ रही हैं। हाल में म्यांमार में सैनिक शासन विरोधी गुटों ने कई सैन्य चौकियों और कस्बों पर नियंत्रण कर लिया है। ताजा घटना भी उसी सिलसिले से जुड़ी हुई है। अराकान आर्मी के एक प्रवक्ता ने कहा कि उसने पालतेवा शहर पर कब्जा कर लिया है। कलादान नदी के तट पर स्थित यह शहर पड़ोसी देशों के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग है। अराकान सेना का दावा है कि उसके पास लगभग 30,000 हथियारबंद लोग हैं और यह सरकार विरोधी त्रिपक्षीय ब्रदरहुड अलायंस का हिस्सा हैं। इस घटना से सीमाई इलाकों में एक नई परिस्थिति बनेगी। विद्रोही गुटों ने कुछ समय पहले चीन की सीमा से लगे एक प्रांत पर कब्जा कर लिया था। तब चीन ने मध्यस्थता की। नतीजतन, विद्रोही गुट और सैन्य शासन के बीच एक करार हुआ। इस तरह चीन ने अपने सुरक्षा हितों की रक्षा की। क्या भारत को भी ऐसी पहल नहीं करनी चाहिए?

RELATED ARTICLES

खेल मैदान बचाइए, तभी खेल संस्कृति बचेगी, खेल नीति में उत्तराखंड को इस पर फोकस करने की जरूरत

उत्तराखण्ड सहित पूरे देश में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक सुविधाओं से लैस बहुमंजिला विद्यालय भवनों की संख्या बढ़ रही...

जाम में जकड़ा उत्तराखंड: बड़े शहरों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर जाम की समस्या बनी नासूर

अनिल चन्दोला देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या...

पुरानी चुनौतियों के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ाएगी चारधाम यात्रा की परेशानी, असमंजस में व्यवसायी

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू में अब चंद दिन ही बाकी हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

सैलरी खत्म होने से पहले खत्म हो जाता है पैसा? अपनाइए सैलरी मैनेजमेंट का यह आसान मनी प्लानिंग फॉर्मूला,

देहरादून। अच्छी सैलरी होने के बावजूद यदि हर महीने हाथ तंग रहता है, तो समस्या कमाई की नहीं, पैसे की प्लानिंग की हो सकती...

देहरादून और हल्द्वानी में बिना मान्यता मदरसों पर शिकंजा, उत्तराखंड में अब तक 20 का संचालन बंद

देहरादून। उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित मदरसों की जांच के बाद प्रशासन की कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। देहरादून में एक मदरसा...

डीएम हुए सख्तः देहरादून में नदियों में कूड़ा फेंकने वालों पर होगी FIR, अवैध डंपिंग साइटों पर भी कार्रवाई

देहरादून। नदियों और नदी किनारों पर कूड़ा डालने वालों के खिलाफ अब सीधे FIR दर्ज होगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शहरी निकायों को...

यूकॉस्ट में शिक्षक दिवस पर व्य़ाख्यानः हिमालयी आपदाओं से निपटने में शिक्षकों और विद्यार्थियों की भूमिका अहम- प्रो. दुर्गेश पंत

देहरादून। हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही आपदा संबंधी चुनौतियों के बीच जल स्रोतों के संरक्षण, वैज्ञानिक जल प्रबंधन और पर्यावरण के प्रति जागरूकता...

Recent Comments