Sunday, September 6, 2026
Home आर्टिकल विपक्ष के लिए विचारणीय

विपक्ष के लिए विचारणीय

बेशक, आज भाजपा के पास अकूत संसाधन हैं। लेकिन उसकी जीत का सिर्फ यही कारण नहीं है। बल्कि वह अपनी हिंदुत्व की राजनीति के पक्ष में इतनी ठोस गोलबंदी कर चुकी है कि चुनावों में उसे परास्त करना अति कठिन हो गया है। चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों का केंद्रीय संदेश यह है कि विपक्ष के पास भारतीय जनता पार्टी की राजनीति की कोई काट नहीं है। तेलंगाना का नतीजा अपवाद है- इसलिए कि वहां सत्ता एक गैर-भाजपा पार्टी के हाथ से निकल कर दूसरी गैर-भाजपा पार्टी के हाथ में गई है। इससे राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा को कोई नुकसान नहीं होगा। असलियत तो यह है कि वहां भी भाजपा ने अपनी सीट और वोट प्रतिशत में इजाफा ही किया है। बहरहाल, आज भी भाजपा का मुख्य गढ़ हिंदी भाषी प्रदेश और देश का पश्चिमी हिस्सा हैं। जिन तीन हिंदी प्रदेशों में चुनाव हुआ, वहां भाजपा ने अपना दबदबा फिर दिखा दिया है।

स्पष्ट है कि इन तीन राज्यों में मुख्य विपक्षी पार्टी यानी कांग्रेस भाजपा से होड़ में आगे निकलने का तोड़ नहीं ढूंढ सकी। इसकी वजह यह है कि जहां 2014 के बाद भारतीय राजनीति का संदर्भ बिंदु आमूल रूप से बदल चुका है, वहीं ये पार्टी (वैसे तमाम विपक्षी पार्टियों का यही हाल है) अपने अतीत और कुछ सियासी टोना-टोटकों से भाजपा को हरा देने की जुगत से ज्यादा नहीं सोच पाती।

बेशक, आज भाजपा के पास धन एवं प्रचार माध्यमों के रूप में अकूत संसाधन हैं। लेकिन उसकी जीत का सिर्फ यही कारण नहीं है। बल्कि वह अपनी हिंदुत्व की राजनीति के पक्ष में इतनी ठोस गोलबंदी कर चुकी है कि चुनावों में उसे परास्त करना अति कठिन हो गया है। राष्ट्रवाद को हिंदुत्व के नजरिए से परिभाषित कर उसने बड़ी संख्या में लोगों की मन-मस्तिष्क में पैठ बना ली है। दूसरी तरफ विपक्ष में कोई भाजपा की वैचारिक शक्ति का विकल्प तैयार करने का प्रयास करता हुआ भी नहीं दिखता है। संभवत: विपक्षी दलों को लगता है कि वे मतदाताओं को प्रत्यक्ष लाभ बांटने की होड़ में आगे दिखा कर चुनाव जीत लेंगे। जबकि भाजपा इस बिंदु पर भी उन्हें ज्यादा जगह नहीं देती। इस पृष्ठभूमि में विपक्षी दलों के लिए असल विचारणीय प्रश्न यह है कि क्या बिना राजनीति की नई परिकल्पना किए और बिना राजनीति करने के नए तरीके ढूंढे वे कभी भी भाजपा को चुनौती दे पाएंगे?

RELATED ARTICLES

खेल मैदान बचाइए, तभी खेल संस्कृति बचेगी, खेल नीति में उत्तराखंड को इस पर फोकस करने की जरूरत

उत्तराखण्ड सहित पूरे देश में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक सुविधाओं से लैस बहुमंजिला विद्यालय भवनों की संख्या बढ़ रही...

जाम में जकड़ा उत्तराखंड: बड़े शहरों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर जाम की समस्या बनी नासूर

अनिल चन्दोला देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या...

पुरानी चुनौतियों के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ाएगी चारधाम यात्रा की परेशानी, असमंजस में व्यवसायी

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू में अब चंद दिन ही बाकी हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

सैलरी खत्म होने से पहले खत्म हो जाता है पैसा? अपनाइए सैलरी मैनेजमेंट का यह आसान मनी प्लानिंग फॉर्मूला,

देहरादून। अच्छी सैलरी होने के बावजूद यदि हर महीने हाथ तंग रहता है, तो समस्या कमाई की नहीं, पैसे की प्लानिंग की हो सकती...

देहरादून और हल्द्वानी में बिना मान्यता मदरसों पर शिकंजा, उत्तराखंड में अब तक 20 का संचालन बंद

देहरादून। उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित मदरसों की जांच के बाद प्रशासन की कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। देहरादून में एक मदरसा...

डीएम हुए सख्तः देहरादून में नदियों में कूड़ा फेंकने वालों पर होगी FIR, अवैध डंपिंग साइटों पर भी कार्रवाई

देहरादून। नदियों और नदी किनारों पर कूड़ा डालने वालों के खिलाफ अब सीधे FIR दर्ज होगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शहरी निकायों को...

यूकॉस्ट में शिक्षक दिवस पर व्य़ाख्यानः हिमालयी आपदाओं से निपटने में शिक्षकों और विद्यार्थियों की भूमिका अहम- प्रो. दुर्गेश पंत

देहरादून। हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही आपदा संबंधी चुनौतियों के बीच जल स्रोतों के संरक्षण, वैज्ञानिक जल प्रबंधन और पर्यावरण के प्रति जागरूकता...

Recent Comments