Tuesday, March 10, 2026
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सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्ती करने का वक्त

नितिन कुमार
सोशल मीडिया कंपनियों की गड़बडिय़ों को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं। केंद्रीय सूचना तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने साफ कहा है कि अब तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से होने वाले फायदों पर नजर थी, लेकिन अब सोशल मीडिया कंपनियों की गड़बडिय़ों पर लगाम कसने का वक्त आ गया है। मंत्री का कहना है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म को आइटी एक्ट के तहत एक हद तक जो सुरक्षा मिली हुई है उसकी समीक्षा की जा रही है।

दूसरी ओर, सोशल मीडिया कंपनियां शिकायतों के निपटारे के प्रति एक तरह से बेपरवाह नजर आ रही हैं। कुछ तो सरकार के नोटिस का जवाब देना भी जरूरी नहीं समझतीं। कुछ सिर्फ खानापूर्ति वाले जवाब देकर इतिश्री समझ लेती हैं। बाल यौन शोषण से संबंधित कंटेंट, भ्रामक सूचनाएं, उकसाने वाली सामग्री को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्देर्शों का पालन भी पूरी तरह नहीं किया जा रहा है। न सिर्फ देश में, बल्कि दुनियाभर में लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है कि सोशल मीडिया कंपनियां अपने मुनाफे के लिए बच्चों के अपरिपक्व दिमाग का दोहन कर रही हैं। जानबूझकर ऐसे कंटेंट डाले जा रहे हैं जिनके प्रति बच्चों-किशोरों में एक तरह का नशा (एडिक्शन) पैदा होता है और वे बार-बार उसी तरह के कंटेंट पर जाते हैं।

अमरीका के 41 राज्यों में मेटा पर मुकदमा चल रहा है। अभी हाल ही में अमरीका के 33 राज्य, जिनमें न्यूयॉर्क और कैलिफोर्निया भी शामिल हैं, के एटॉर्नी जनरल ने मेटा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है कि वह जानबूझकर भ्रामक और खतरनाक सूचनाएं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर रही है, जिससे किशोर और युवा उसके लती और बीमार हो रहे हैं। अमरीका और यूरोप के कई देश पहले ही सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ भृकुटि टेढ़ी कर चुके हैं। हमारे यहां इस मामले में सरकार का रवैया लचर ही रहा है। इतना जरूर है कि अब प्रस्तावित डिजिटल इंडिया कानून के मसौदे में कंपनियों पर लगाम कसने के लिए कुछ सख्त प्रावधान किए गए हैं।

जब तक कानून लागू नहीं होता तब तक क्या ऐसा ही चलता रहेगा? इस सवाल का जवाब भी सरकार को सख्ती दिखाते हुए देना होगा। मंत्री ने वादा जरूर किया है कि सरकार ऐसे उपाय करने पर विचार कर रही है, जिसमें नियम-7 का इस्तेमाल कर आइटी एक्ट के सेक्शन 79 के तहत कंपनियों को मिली सुरक्षा समाप्त की जा सकती है। सोशल मीडिया जिस तरह से हर घर में किशोरों और युवाओं को गिरफ्त में ले रहा है, सख्ती बरतनी ही होगी।

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