Saturday, April 5, 2025
Home फीचर वॉर्मिंग में इतनी ठंड

वॉर्मिंग में इतनी ठंड

जब कभी असामान्य ठंड पड़ती है, तो लोग इस सवाल पर बात करने लगते हैं कि आखिर जब चर्चा ग्लोबल वॉर्मिंग यानी धरती का तापमान बढऩे की है, तो उस समय इतनी ठंड क्यों पड़ रही है। जबकि इसमें हैरत की कोई बात नहीं है। उत्तर-मध्य भारत में इस बार ठंड देर से पड़ी, लेकिन खूब जोरदार पड़ी है। ये दोनों स्थितियां असामान्य हैं। उसी समय जम्मू-कश्मीर में लोग बर्फबारी के तरस कर रह गए हैं। यह भी एक असामान्य स्थिति है। ऐसे असामान्य हालात का अक्सर दुनिया को सामना करना पड़ रहा है। बहरहाल, जब कभी किसी क्षेत्र में असामान्य ठंड पड़ती है, तो लोग इस सवाल पर बात करने लगते हैं कि आखिर जब चर्चा ग्लोबल वॉर्मिंग यानी धरती का तापमान बढऩे की है, तो उस समय इतनी ठंड क्यों पड़ रही है। जबकि इसमें हैरत की कोई बात नहीं है। ऐसा होना भी असल में जलवायु परिवर्तन का ही एक हिस्सा है। यह तो आम जानकारी है कि जलवायु परिवर्तन ग्लोबल वॉर्मिंग का परिणाम है। वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (डब्लूडब्लूए) का एक ताजा विश्लेषण इस सवाल को समझने के लिए लिहाज से महत्त्वपूर्ण है।

डब्लूडब्लूए वैज्ञानिक संगठनों का एक समूह है। उसने 2023 में आई एक दर्जन से ज्यादा आपदाओं का विश्लेषण किया। उसकी रिपोर्ट में वैज्ञानिक साक्ष्य की मदद से बताया गया है कि जीवाश्म ईंधन से होने वाला उत्सर्जन किस तरह से तूफान, सूखा, जंगल की आग और गर्म लहरों को विनाशकारी बना रहा है। 2023 में जीवाश्म ईंधन से होने वाला उत्सर्जन चरम पर था। इसका परिणाम असाधारण बारिश और सामान्य से ज्यादा ठंड के रूप में भी सामने आया है। मतलब यह कि ग्लोबल वॉर्मिंग से जलवायु बदल रहा है। इस कारण बेमौसमी घटनाएं आम होती जा रही हैं। इससे यह अनुमान लगाना कठिन हो गया है कि कब बारिश होगी, कब ठंड पड़ेगी और कब गरमी का सामना करना होगा। ये बेमौसमी घटनाएं असाधारण रूप से मारक और तीव्र होने लगी हैं। फिर भी दुनिया सबक नहीं ले रही है। दुनिया में कार्बन उत्सर्जन की मौजूदा स्थिति के हिसाब से संयुक्त राष्ट्र ने हाल में एक रिपोर्ट जारी की। उससे पता चला है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से वर्ष 2100 तक वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर की तुलना में 2.9 डिग्री सेल्सियस तक बढऩे की आशंका है। जबकि वैज्ञानिक पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि 1.5 डिग्री से ज्यादा तापमान बढऩा खतरनाक है।

RELATED ARTICLES

विकास के दावों के बीच भूख की त्रासदी झेलने के लिए लोग मजबूर

 विश्‍वनाथ झा यह अपने आप में एक बड़ा विरोधाभास है कि जिस दौर में दुनिया भर में अर्थव्यवस्था के चमकते आंकड़ों के जरिए लगातार विकास...

 बोतलबंद पानी नहीं, जहर पी रहे हैं हम  

ज्ञानेन्द्र रावत आधुनिक जीवनशैली के तहत हम सभी अपने जीवन को सुखमय बनाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास कर रहे हैं। वह चाहे भौतिक सुख...

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली 81.1 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित

गीता यादव गर्भवती महिलाओं पर किए एक अध्ययन से पता चला है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली 81.1 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

अंतिम स्तर पर पहुंची चार धाम यात्रा की तैयारियां, 30 अप्रैल से होगी शुरूआत, भीड़ नियंत्रण के होंगे उपाय

देहरादून। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां तेजी से चल रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार यात्रा 10...

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के तीन साल पूरे, प्रदेशभर में आयोजित हो रहे कार्यक्रम

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने उत्तराखंड में अपने तीन साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस अवसर...

दून में शुरू हुआ इण्डो-नेपाल अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला और पर्यटन महोत्सव, सीएम धामी भी हुए शामिल

देहरादून। राजधानी देहरादून में इण्डो-नेपाल अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला और पर्यटन महोत्सव की शुरूआत हो गई है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी महोत्सव...

चारधाम यात्रा के दौरान खाद्य सुरक्षा पर धामी सरकार सख्त, खाद्य संरक्षा विभाग चला रहा विशेष अभियान

देहरादून। आगामी चारधाम, हेमकुंड साहिब यात्रा और पर्यटन सीजन के दौरान खाद्य सुरक्षा पर प्रदेश की धामी सरकार सख्त रुख अपनाएगी। इसको लेकर खाद्य...

Recent Comments