नई दिल्ली। मोदी सरकार ने देश के करोड़ों लोगों को बड़ी राहत देते हुए इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव किया है। मध्य वर्ग की वर्षों से चली आ रही मांग पर सरकार ने 12 लाख तक की सालाना आय को इनकम टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया है। इसका मतलब है कि अब सालाना 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा।
शनिवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना लगातार आठवां बजट पेश करते हुए यह बड़ा ऐलान किया। इसके अलावा नौकरीपेशा लोगों को सालाना 75 हजार रुपये स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ भी मिलेगा। इस लिहाज से उन्हें 12 लाख 75 हजार रुपये तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।
नई कर व्यवस्था के तहत संशोधित आयकर स्लैब
- 0-4 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर नहीं।
- 4-8 लाख की आय पर 5 प्रतिशत
- 8-12 लाख की आय पर 10 प्रतिशत
- 12-16 लाख की आय पर 15 प्रतिशत
- 16-20 लाख की आय पर 20 प्रतिशत
- 20-24 लाख की आय पर 25 प्रतिशत
- 24 लाख से ऊपर की आय पर 30 प्रतिशत
इसके अलावा सरकार ने बुजुर्गों के लिए टीडीएस सीमा को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया है। साथ ही रेंट टीडीएस की लिमिट भी बढ़ाकर छह लाख रुपये कर दी गई है।
क्या होगा इस फैसले का असर?
लोगों की क्रय शक्ति बढे़गी
इनकम टैक्स में छूट दिए जाने से मध्यम वर्ग से जुड़े लोगों के पास ज्यादा पैसे बचेंगे। इससे उनकी क्रय शक्ति में बढ़ोतरी होगी। इस कारण आने वाले समय में उपभोक्ता खर्च में वृद्धि देखने को मिल सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी
लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने के कारण आने वाले समय में अर्थव्यवस्था में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के लिए मांग बढ़ेगी। टैक्स स्लैब में छूट मिलने की वजह से लोगों के पास ज्यादा पैसे खर्च करने के लिए होंगे।
बचत और निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार के इस फैसले के बाद 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, ऐसे में लोग पैसों की बचत कर सकेंगे या उसे किसी अच्छी जगह पर निवेश कर सकेंगे।