Janprtinidhi https://janprtinidhi.com जनप्रतिनिधि Sat, 31 Oct 2026 15:25:34 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.4 https://janprtinidhi.com/wp-content/uploads/2026/05/Janprtinidhi-New-Logo-48x48.jpg Janprtinidhi https://janprtinidhi.com 32 32 सूचना विभाग में तीन दशक की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए रईस अहमद, अधिकारियों व कर्मचारियों ने दी विदाई https://janprtinidhi.com/soochna-vibhag/ https://janprtinidhi.com/soochna-vibhag/#respond Sat, 31 Oct 2026 15:25:34 +0000 https://janprtinidhi.com/?p=10174 देहरादून। उत्तराखंड के सूचना एवं लोक संपर्क विभाग में करीब 30 वर्षों तक सेवाएं देने के बाद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रईस अहमद सेवानिवृत्त हो गए। उनके सम्मान में विभाग की ओर से विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके साथ काम करने के अनुभव साझा किए और उनके स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम में सूचना विभाग के महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने रईस अहमद को सम्मानित करते हुए उनके लंबे सेवाकाल की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी विभाग की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने में प्रत्येक कर्मचारी की अहम भूमिका होती है। विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का योगदान भी कार्यप्रणाली को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण रहता है।

महानिदेशक ने कहा कि रईस अहमद ने लगभग तीन दशक तक पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। उनका समर्पण और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता अन्य कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति सेवा जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन किसी कर्मचारी का अनुभव, व्यवहार और विभाग के प्रति उसका योगदान लंबे समय तक याद रखा जाता है। उन्होंने रईस अहमद के आगामी जीवन के लिए बेहतर स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

स्मृति चिह्न देकर किया सम्मानित

विदाई समारोह के दौरान विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने रईस अहमद के साथ बिताए समय को याद किया। उनके कार्यकाल से जुड़े अनुभव साझा करते हुए सहकर्मियों ने उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस अवसर पर उन्हें स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।

कार्यक्रम में अपर निदेशक आशीष त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक नितिन उपाध्याय, उप निदेशक मनोज श्रीवास्तव, रवि बिजारनिया और बद्री चंद सहित विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। रईस अहमद के परिजन भी समारोह में शामिल हुए।

कर्मचारी संघ के पदाधिकारी भी रहे मौजूद

समारोह में सूचना कर्मचारी संघ की ओर से अध्यक्ष कैलाश रावत, उपाध्यक्ष प्रशांत रावत, संजय कुमार, महामंत्री अंकित चौहान, कोषाध्यक्ष राकेश कुमार धीमान और संयुक्त मंत्री पारूल चौधरी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सहकर्मियों ने रईस अहमद के साथ बिताए कार्यकाल को याद करते हुए उनके प्रति शुभकामनाएं व्यक्त कीं। करीब 30 वर्षों तक विभाग में सेवाएं देने के बाद उनकी सेवानिवृत्ति के अवसर पर आयोजित यह समारोह आत्मीय माहौल में संपन्न हुआ।

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उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर हादसा: जोशीमठ के पास पहाड़ी से टकराया हेलीकॉप्टर, पायलट समेत 6 की मौत https://janprtinidhi.com/uttarakhand-helicopter-crash/ https://janprtinidhi.com/uttarakhand-helicopter-crash/#respond Fri, 30 Oct 2026 16:40:59 +0000 https://janprtinidhi.com/?p=10170 चमोली/जोशीमठ। उत्तराखंड में शुक्रवार को एक दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे में पायलट समेत छह लोगों की मौत हो गई। हादसा चमोली जिले में जोशीमठ के पास चाई गांव के ऊपर हुआ, जहां बदरीनाथ से देहरादून के सहस्रधारा के लिए लौट रहा हेलीकॉप्टर पहाड़ी से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद शुरू किए गए सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में सभी छह शव बरामद कर लिए गए हैं।

यह हेलीकॉप्टर Trans Bharat Aviation Pvt. Ltd. का था और इसका कॉल साइन VT-HCX था। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के अनुसार हेलीकॉप्टर ने शुक्रवार दोपहर करीब 1:14 बजे बदरीनाथ से सहस्रधारा, देहरादून के लिए उड़ान भरी थी। जोशीमठ घाटी के ऊपर पहुंचने के बाद हेलीकॉप्टर से संपर्क टूट गया और उसका ट्रैकिंग सिस्टम भी उसकी लोकेशन दिखाना बंद कर दिया।

संपर्क टूटने के बाद चमोली जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और सेना की टीमें हेलीकॉप्टर की तलाश में जुट गईं। बाद में जोशीमठ के पास चाई गांव और जेपी पावर हाउस के आसपास पहाड़ी क्षेत्र में हेलीकॉप्टर का मलबा मिला। खराब मौसम, बारिश और कई इलाकों में बर्फबारी के कारण राहत और बचाव अभियान में मुश्किलें आईं।

हादसे में जान गंवाने वालों में पायलट कैप्टन हिमांशु के अलावा प्रताप, अरुण, शंकर गौड़ा, सुधीर के. और एचएस नटराजा शामिल हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पांचों यात्री बेंगलुरु के रहने वाले थे।

हादसे के समय उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम खराब था। बदरीनाथ और केदारनाथ समेत कई ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी की सूचना थी। हालांकि हेलीकॉप्टर दुर्घटना का वास्तविक कारण अभी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है। खराब मौसम को संभावित परिस्थितियों में बताया जा रहा है, लेकिन दुर्घटना के कारण पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।

हादसे के बाद UCADA ने एहतियाती कदम उठाते हुए Trans Bharat Aviation के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े को ग्राउंड कर दिया है। यानी कंपनी के अन्य हेलीकॉप्टरों के संचालन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और एसडीआरएफ की टीमें संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं और उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निगरानी की। शुरुआती चरण में उन्होंने गंभीर रूप से घायलों को एयरलिफ्ट कर उच्च चिकित्सा केंद्र पहुंचाने के निर्देश दिए थे, लेकिन बाद में अधिकारियों ने सभी छह लोगों की मौत की पुष्टि कर दी।

यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब उत्तराखंड के चारधाम क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल रहा है। पिछले वर्ष भी 15 जून 2025 को केदारनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर गौरीकुंड क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें सात लोगों की मौत हुई थी।

इस साल के हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड में ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन, मौसम की स्थिति और उड़ान सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि इस हादसे के कारणों और सुरक्षा मानकों से जुड़ी विस्तृत तस्वीर संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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उत्तराखंड में मौसम का ऑरेंज अलर्ट, 5 जिलों में आंधी-ओलावृष्टि की चेतावनी; अलर्ट मोड पर प्रशासन https://janprtinidhi.com/weather-orange-alert/ https://janprtinidhi.com/weather-orange-alert/#respond Thu, 29 Oct 2026 15:26:27 +0000 https://janprtinidhi.com/?p=10165
देहरादून। उत्तराखंड में 30 अक्टूबर को मौसम बिगड़ने की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने पांच जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। चेतावनी के अनुसार नैनीताल, चम्पावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चमोली जनपदों में कहीं-कहीं गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने, ओलावृष्टि तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका है। वहीं, पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल और चम्पावत में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना भी जताई गई है।
मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग ने एहतियाती तैयारियां तेज कर दी हैं। सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने संबंधित जनपदों के अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की और सभी अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए।

 

मुख्यमंत्री और आपदा प्रबंधन मंत्री ने दिए सुरक्षा के निर्देश

मौसम की संभावित प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन से बातचीत कर आम जनता की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि मौसम विभाग की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए सभी जनपदों को आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाएं पूरी तरह सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने संबंधित विभागों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है।

चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष सतर्कता के निर्देश

मौसम खराब होने की आशंका के बीच चारधाम यात्रा मार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सचिव ने अधिकारियों से कहा कि यात्रा मार्गों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और मौसम अथवा किसी संभावित खतरे की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि परिस्थितियों के अनुसार समय पर आवश्यक निर्णय लिए जाएं, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। संबंधित अधिकारियों को यात्रा मार्गों पर निगरानी बनाए रखने और किसी भी जोखिम की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

संवेदनशील क्षेत्रों में अलर्ट रहें अधिकारी

आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जनपदों को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।इसके साथ ही आपदा प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत नामित अधिकारियों और विभागीय नोडल अधिकारियों को अलर्ट रहने तथा किसी भी घटना की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

 

भूस्खलन और सड़कें बंद होने की आशंका, मशीनरी तैयार रखने के निर्देश

पर्वतीय क्षेत्रों में खराब मौसम के दौरान भूस्खलन, सड़कें अवरुद्ध होने और अन्य आपात परिस्थितियों की आशंका को देखते हुए लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग, सीमा सड़क संगठन और अन्य संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को अपनी मशीनरी तथा आवश्यक संसाधन तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।सचिव ने कहा कि यदि किसी स्थान पर सड़क मार्ग बाधित होता है, तो संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई करते हुए मार्ग को सुचारु करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इसका उद्देश्य आम जनता और यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करना तथा आपात परिस्थितियों में आवागमन को यथासंभव सुरक्षित बनाए रखना है।

 

प्रशासन ने तैयारियां पूरी रखने के दिए निर्देश

मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर राज्य में आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का जोर संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, आपात संसाधनों की उपलब्धता और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर है, ताकि मौसम खराब होने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

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Uttarakhand Assembly Session: डेढ़ दिन में खत्म हुआ सत्र, 7844 करोड़ का बजट पास; सड़क से लौटे CM https://janprtinidhi.com/uttarakhand-assembly-session/ https://janprtinidhi.com/uttarakhand-assembly-session/#respond Wed, 28 Oct 2026 15:57:13 +0000 https://janprtinidhi.com/?p=10160 भराड़ीसैंण (गैरसैंण)। उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र तय अवधि पूरी होने से पहले ही बुधवार को डेढ़ दिन में समाप्त हो गया। सत्र के अंतिम दिन सदन में विपक्ष के विरोध, नारेबाजी और हंगामे के बीच सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित कराया। इसके साथ ही अनुपूरक विनियोग विधेयक समेत कुल 10 विधेयकों को भी सदन की मंजूरी मिली। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।

बुधवार को कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर विरोध शुरू कर दिया। विपक्षी विधायक सदन के वेल में पहुंचे और नारेबाजी की। कांग्रेस की ओर से नियम 310 के तहत 210 करोड़ रुपये से जुड़े मामले पर चर्चा की मांग की गई। विरोध के दौरान काले झंडे भी दिखाए गए। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।

सत्ता पक्ष ने इस विरोध के बीच विधायी कामकाज पूरा किया। सरकार की ओर से पारित अनुपूरक बजट में 4,164.32 करोड़ रुपये पूंजीगत मद और 3,679.86 करोड़ रुपये राजस्व मद के लिए रखे गए हैं। मूल बजट 1,11,703.21 करोड़ रुपये में अनुपूरक बजट जुड़ने के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का कुल बजट आकार 1,19,547.39 करोड़ रुपये हो गया है।

सत्र की खास बात यह रही कि करीब डेढ़ दिन की कार्यवाही में ही सरकार ने बजट और विधायी एजेंडा पूरा कर लिया। उपलब्ध विवरण के अनुसार 27 और 28 अक्टूबर को सदन की कुल कार्यवाही लगभग आठ घंटे चार मिनट चली। वर्ष 2026 में गैरसैंण में यह दूसरा विधानसभा सत्र था। यह मौजूदा पंचम विधानसभा का अंतिम सत्र भी रहा।

सत्र समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गैरसैंण से देहरादून के लिए रवाना हुए। वह जीवीके हेलीपैड से श्रीनगर पहुंचे और इसके बाद सड़क मार्ग से आगे का सफर किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने श्रीनगर से देवप्रयाग के बीच राजमार्ग की स्थिति का जायजा लिया और सड़क निर्माण से जुड़े कामों को भी देखा। मूल्यगांव के पास उन्होंने सड़क निर्माण में लगे मजदूरों से रुककर बातचीत की।

श्रीनगर चुंगी के पास मुख्यमंत्री मंगल सिंह की स्थानीय चाय की दुकान पर भी रुके। उन्होंने वहां चाय पी और दुकानदारों तथा स्थानीय लोगों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद लोगों को खुद चाय भी परोसी। स्थानीय दुकान पर रुकने के इस अंदाज को छोटे कारोबारियों और स्थानीय बाजार को प्रोत्साहित करने के संदेश से जोड़कर देखा गया।

देवप्रयाग पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने स्थानीय दुकानदारों और महिलाओं से संवाद किया। उन्होंने बस अड्डे स्थित सुलभ शौचालय का निरीक्षण कर उसे आधुनिक सुविधाओं से विकसित करने के निर्देश दिए। इसके बाद वह संगम व्यू प्वाइंट पहुंचे और अलकनंदा-भागीरथी के संगम के दर्शन किए।

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उत्तराखंड अनुपूरक बजट 2026: गैरसैंण में 7,844 करोड़ का बजट, किसान-स्वास्थ्य-शिक्षा पर बड़ा फोकस https://janprtinidhi.com/gairsain-vidhansabha-satr/ https://janprtinidhi.com/gairsain-vidhansabha-satr/#respond Tue, 27 Oct 2026 16:58:16 +0000 https://janprtinidhi.com/?p=10155

गैरसैंण। उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट विधानसभा में प्रस्तुत किया है। गैरसैंण के भराड़ीसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के लिए तैयार इस अनुपूरक बजट में सड़क, पेयजल, ऊर्जा, शहरी विकास, स्थानीय निकाय, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

कुल अनुपूरक बजट में 4,164.32 करोड़ रुपये पूंजीगत मद और 3,679.86 करोड़ रुपये राजस्व मद में प्रस्तावित किए गए हैं। अनुपूरक बजट जुड़ने के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य के मूल बजट 1,11,703.21 करोड़ रुपये से बढ़कर कुल बजट आकार 1,19,547.39 करोड़ रुपये हो जाएगा।

स्थानीय निकायों को बढ़ेगा वित्तीय हिस्सा

अनुपूरक बजट में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों को स्वीकार करते हुए राज्य के कर राजस्व में स्थानीय निकायों का हिस्सा 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों को स्थानीय विकास कार्यों तथा जनसुविधाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होने की उम्मीद है।

प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए विशेष सहायता योजना (SASCI) के तहत 500 करोड़ रुपये का पूंजीगत प्रावधान किया गया है। ऊर्जा क्षेत्र में खुरपिया फार्म परियोजना समेत पारेषण और वितरण व्यवस्था से जुड़े कार्यों के लिए लगभग 270 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। शहरी विकास विभाग की एशियाई विकास बैंक से पोषित योजनाओं के लिए करीब 100 करोड़ रुपये और पुलिस विभाग के आवासीय एवं अनावासीय भवनों के निर्माण के लिए लगभग 55 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

न्यायिक अवस्थापना सुविधाओं के लिए करीब 22 करोड़ रुपये और पंचायत भवनों के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कों के अनुरक्षण समेत लोक निर्माण विभाग के लिए 31 करोड़ रुपये तथा ग्राम्य विकास विभाग के लिए 30 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।

धान-गेहूं खरीद के लिए 1,100 करोड़ रुपये

अनुपूरक बजट में किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी प्रमुखता दी गई है। अन्नपूर्ति योजना के तहत किसानों से धान और गेहूं की खरीद के लिए 1,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि, जलवायु अनुकूल खेती, खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता और वैकल्पिक आजीविका से जुड़ी योजनाओं के लिए भी अतिरिक्त धनराशि प्रस्तावित की गई है।

उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना के लिए 70 करोड़ रुपये रखे गए हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना यानी पीएमएफएमई के लिए करीब 35 करोड़ रुपये का प्रावधान है। दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लिए 20 करोड़ और किसान पेंशन योजना के लिए 9 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों में वैकल्पिक आजीविका को बढ़ावा देने के लिए ट्राउट प्रोत्साहन योजना में करीब 28 करोड़ रुपये तथा नई मौन पालन नीति के लिए एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गौ सदनों के निर्माण के लिए करीब 9 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

आयुष्मान और गोल्डन कार्ड के लिए 225 करोड़

स्वास्थ्य क्षेत्र में अटल आयुष्मान योजना और राज्य कर्मचारियों की गोल्डन कार्ड योजना के लिए कुल 225 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें अटल आयुष्मान योजना के लिए 100 करोड़ और राज्य कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने वाली गोल्डन कार्ड योजना के लिए 125 करोड़ रुपये शामिल हैं।

चिकित्सा शिक्षा की अवस्थापना सुविधाओं के लिए भी करीब 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज तथा नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े कार्य शामिल हैं।

डिजिटल लर्निंग के लिए 200 करोड़, प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग को भी बजट

शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है। विद्यालयी और उच्च शिक्षा में डिजिटल लर्निंग के लिए 200 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के तहत माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को NEET, JEE और CLAT जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग उपलब्ध कराने के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

युवा और खेल क्षेत्र में भी कई योजनाओं के लिए बजट रखा गया है। खेल विश्वविद्यालय के लिए करीब 35 करोड़ रुपये, चंपावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए 10 करोड़ रुपये और आगामी राष्ट्रीय खेलों से पहले खिलाड़ियों के विशेष प्रशिक्षण शिविरों के लिए 8 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। खिलाड़ियों की छात्रवृत्ति के लिए करीब 5.50 करोड़ रुपये और ओपन जिम की स्थापना के लिए 5 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

पोषण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भी जोर

महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए भी अनुपूरक बजट में प्रावधान किया गया है। सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत करीब 60 करोड़ रुपये रखे गए हैं। भोजन माताओं के मानदेय के लिए 20 करोड़ रुपये और निराश्रित विधवा पेंशन के लिए करीब 27 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

विभिन्न कल्याणकारी पेंशन योजनाओं के लिए करीब 93 करोड़ रुपये का प्रावधान है। मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री बाल सानिध्य योजना के लिए एक करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

उत्तराखंड सरकार के अनुपूरक बजट में पूंजीगत विकास के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, स्थानीय निकाय और सामाजिक सुरक्षा को अतिरिक्त संसाधन देने पर जोर दिखाई देता है। बजट के प्रावधानों के जरिए पहले से संचालित योजनाओं को अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने के साथ बुनियादी ढांचे और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

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देहरादून में 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन का समापन, शोध और नवाचार के प्रतिभागी हुए सम्मानित https://janprtinidhi.com/ucost-usstc-2026/ https://janprtinidhi.com/ucost-usstc-2026/#respond Mon, 26 Oct 2026 13:28:01 +0000 https://janprtinidhi.com/?p=10150 देहरादून। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शोध और नवाचार के क्षेत्र में उत्तराखंड की संभावनाओं पर केंद्रित 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC-2026) का सोमवार को विज्ञान धाम, यूकॉस्ट देहरादून में समापन हुआ। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से 25 और 26 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, शिक्षाविदों और विभिन्न संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान शोध प्रस्तुतियों, तकनीकी सत्रों और विचार-विमर्श के जरिए हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों पर चर्चा हुई।

सम्मेलन के दूसरे दिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, नीति, आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास से जुड़े आठ विचार-मंथन सत्र आयोजित किए गए। इनमें हिमालयी आपदा सहनशीलता, साइबर-भौतिक प्रणालियां, STEM और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा क्षेत्र में विज्ञान एवं तकनीक, विज्ञान और आध्यात्मिकता, STI Policy 2026 में विज्ञान संचार और मीडिया की भूमिका, STEM में महिलाओं की भागीदारी, उत्तराखंड में अनुसंधान एवं विकास तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों जैसे विषय शामिल रहे।

विचार-विमर्श में उत्तराखंड की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने आपदा सहनशीलता, हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास, तकनीकी नवाचार और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर चर्चा की। साथ ही वैज्ञानिक संस्थानों, सरकार और अन्य हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा शोध को व्यावहारिक उपयोग तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में कुल 261 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें 189 मौखिक प्रस्तुतियां और 72 पोस्टर प्रस्तुतियां शामिल रहीं। समापन अवसर पर विभिन्न विषयों के तकनीकी सत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

इन शोधकर्ताओं को मिला तकनीकी सत्रों में सम्मान

कृषि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान एवं वानिकी वर्ग की मौखिक प्रस्तुति में प्रथम पुरस्कार आस्था जोशी, जीबी पंत विश्वविद्यालय, पंतनगर को और द्वितीय पुरस्कार अब्दुल वारिश, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर को मिला। पोस्टर प्रस्तुति में प्रथम पुरस्कार प्रवीण गुनवंत, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा तथा द्वितीय पुरस्कार चंद्रमोहन सिंह, कॉलेज ऑफ फॉरेस्ट्री, रानीचौरी को दिया गया।

बायोटेक्नोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री एवं माइक्रोबायोलॉजी में मौखिक प्रस्तुति का प्रथम पुरस्कार शीटल अल्चोनी, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर और द्वितीय पुरस्कार देव आशीष गिरी, यज्ञवल्क्य सेंटर फॉर यज्ञ रिसर्च, देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार को मिला। पोस्टर वर्ग में अंशुल गैरोला, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय, बीजीआर कैंपस, पौड़ी को प्रथम और पूजा सिंह, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय, देहरादून को द्वितीय पुरस्कार मिला।

केमिकल साइंसेज में मौखिक प्रस्तुति के लिए पूजा बरगली, जीबी पंत विश्वविद्यालय, पंतनगर को प्रथम और गरिमा पुनेठा, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी को द्वितीय पुरस्कार मिला। पोस्टर वर्ग में आकांक्षा कोटियाल, जीबी पंत विश्वविद्यालय को प्रथम तथा गौरव शर्मा, एसजीआरआर विश्वविद्यालय, देहरादून को द्वितीय पुरस्कार दिया गया।

अर्थ साइंसेज के अंतर्गत जियोलॉजी, जियो-मॉर्फोलॉजी, जियो-फिजिक्स, ग्लेशियोलॉजी और भूगोल वर्ग की मौखिक प्रस्तुति में आयुष कुकरेती, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की को प्रथम और डॉ. दीप्ति सेमवाल, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय को द्वितीय पुरस्कार मिला। पोस्टर वर्ग में प्रथम पुरस्कार के लिए उपयुक्त प्रस्तुति नहीं मिली, जबकि द्वितीय पुरस्कार महेंद्र सिंह, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय को मिला।

इंजीनियरिंग साइंसेज, मैटेरियल साइंस एवं नैनो टेक्नोलॉजी में मौखिक प्रस्तुति का प्रथम पुरस्कार विनय रावत, एसजीआरआर विश्वविद्यालय और द्वितीय पुरस्कार प्रभात पंत, डीएसबी कैंपस, कुमाऊं विश्वविद्यालय को मिला। पोस्टर में अभिषेक रतूड़ी, एसजीआरआर पीजी कॉलेज, देहरादून को प्रथम पुरस्कार दिया गया।

होम साइंस, हेल्थ एंड न्यूट्रिशन में मौखिक प्रस्तुति के लिए सूर्य तेजस्वी देसू, जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को प्रथम तथा मोनिका नेगी, देवभूमि विश्वविद्यालय को द्वितीय पुरस्कार मिला। पोस्टर वर्ग में कोई प्रस्तुति पुरस्कार के लिए उपयुक्त नहीं पाई गई।

मैथेमेटिक्स एवं स्टैटिस्टिक्स वर्ग की मौखिक प्रस्तुति में दिव्यांशु चमोली, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय को प्रथम और अंकित अग्रवाल, एसजीआरआर विश्वविद्यालय को द्वितीय पुरस्कार मिला। पोस्टर वर्ग में कोई प्रस्तुति पुरस्कार के लिए चयनित नहीं हुई। कंप्यूटर साइंस एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्ग में मौखिक और पोस्टर दोनों श्रेणियों में पुरस्कार के लिए उपयुक्त प्रस्तुति नहीं मिली।

मेडिकल एवं फार्मास्युटिकल साइंसेज में मौखिक प्रस्तुति का प्रथम पुरस्कार संजय तमता, एसजीआरआर विश्वविद्यालय को मिला। पोस्टर वर्ग में शिखा, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय को प्रथम और विक्रम चौहान, आईसीएफआरई देहरादून को द्वितीय पुरस्कार दिया गया।

फिजिकल साइंसेज की मौखिक प्रस्तुति में प्रथम पुरस्कार के लिए कोई उपयुक्त प्रस्तुति नहीं मिली, जबकि द्वितीय पुरस्कार सुशील चौहान, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, श्रीनगर को मिला। पोस्टर वर्ग में राकेश चंद्र जोशी, डीएसबी कैंपस, कुमाऊं विश्वविद्यालय को प्रथम पुरस्कार दिया गया।

रूरल साइंस, टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी वर्ग में मौखिक प्रस्तुति के लिए पाटिल तेजस्विनी धनाजी, आईआईटी रुड़की को प्रथम और वाणी श्री, यज्ञवल्क्य सेंटर फॉर यज्ञ रिसर्च, देव संस्कृति विश्वविद्यालय को द्वितीय पुरस्कार मिला। पोस्टर वर्ग में प्रांजलि भट्ट, वीसीएसजी यूयूएचएफ, कॉलेज ऑफ फॉरेस्ट्री, रानीचौरी को प्रथम पुरस्कार मिला।

जूलॉजी, वेटरिनरी साइंस एवं एनिमल हसबेंड्री में मौखिक प्रस्तुति का प्रथम पुरस्कार ऋषभ राणा, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय को और द्वितीय पुरस्कार ज्योति बिष्ट, एसआरटी कैंपस, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय को मिला। पोस्टर वर्ग में दिव्या नेगी, डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून को प्रथम पुरस्कार दिया गया। इनोवेटर ऑफ द ईयर का सम्मान श्रेया नैथानी को प्रदान किया गया।

युवा महिला वैज्ञानिकों को भी किया गया सम्मानित

विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में योगदान के लिए यूकॉस्ट युवा महिला वैज्ञानिक पुरस्कार से डॉ. खष्टी दसिला, सहायक प्राध्यापक, वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी; डॉ. अलका पंत, एसोसिएट प्रोफेसर, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, देहरादून; सुश्री श्रुति सेमवाल, डीएसटी-इंस्पायर फेलो, एचएनबीजीयू एसआरटी परिसर, बादशाहीथौल, टिहरी गढ़वाल तथा डॉ. विनिता गौरी, यंग प्रोफेशनल-II, आईसीएआर-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा को सम्मानित किया गया। विज्ञान शिक्षा प्रसार सम्मान डॉ. विजेता बिष्ट, जीजीएचएस स्कूल, कनकपुर, कोटाबाग, नैनीताल को प्रदान किया गया।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग के विजेता

द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग-2026 के जूनियर वर्ग में नैनीताल जनपद ने पहला स्थान हासिल किया। टीम में चिन्मय भरगली और सात्विक शर्मा शामिल रहे। देहरादून की वंशिका और आकाश ने दूसरा तथा ऊधम सिंह नगर के भगत प्रीत कौर और अंश वीर सिंह ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

सीनियर वर्ग में टिहरी गढ़वाल के आदित्य राज और अयान गुप्ता प्रथम स्थान पर रहे। चमोली के देवेंद्र सिंह और प्रिंस भंडारी ने दूसरा तथा उत्तरकाशी के इशांत कोठारी और छवि नौटियाल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

मीडिया कवरेज और दस्तावेजीकरण में योगदान पर सम्मान

सम्मेलन की मीडिया कवरेज एवं दस्तावेजीकरण में योगदान के लिए वर्षा नेगी, रेहाना ज़हरा और शिंजिनी रावत, दून विश्वविद्यालय; आशाखा दुखाला और उत्कर्ष यादव, ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय को सम्मानित किया गया।

समापन सत्र में कई गणमान्य अतिथि रहे मौजूद

सम्मेलन के समापन सत्र में उत्तराखंड की पूर्व मुख्य सचिव एवं मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। सत्र की अध्यक्षता डॉ. सतपाल सिंह बिष्ट ने की। पूर्व डीआईजी अनिल रतूड़ी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। विज्ञान भारती के अध्यक्ष केडी पुरोहित और जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा के निदेशक डॉ. आईडी भट्ट भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

दो दिवसीय USSTC-2026 के माध्यम से शोध, शिक्षा, शासन, उद्योग, मीडिया और नवाचार से जुड़े विभिन्न पक्षों को साझा मंच मिला। सम्मेलन में युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की भागीदारी के साथ विज्ञान एवं नीति-निर्माण के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखते हुए हिमालयी आपदा प्रबंधन, सतत विकास, तकनीकी नवाचार और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण को सम्मेलन के प्रमुख विषयों के रूप में सामने रखा गया।

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रुद्रप्रयाग में चारधाम समेत स्थानीय यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत, सीएम धामी ने किया पुल-सुरंग मार्ग का निरीक्षण https://janprtinidhi.com/rudraprayag-cm-dhami/ https://janprtinidhi.com/rudraprayag-cm-dhami/#respond Mon, 26 Oct 2026 12:06:09 +0000 https://janprtinidhi.com/?p=10147 रुद्रप्रयाग। चारधाम यात्रा के दौरान रुद्रप्रयाग शहर में बढ़ने वाले यातायात दबाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अलकनंदा नदी पर तैयार पुल और सुरंग को जोड़ने वाले नए मार्ग पर सोमवार से ट्रायल के आधार पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मौके पर पहुंचकर परियोजना का निरीक्षण किया और अधिकारियों से इसकी प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जल्द ही इसका औपचारिक लोकार्पण किया जाएगा।

करीब 156 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना में अलकनंदा नदी पर 200 मीटर लंबा पुल और 900.30 मीटर लंबी सुरंग शामिल है। संपर्क मार्ग को मिलाकर पूरा पुल-सुरंग कॉरिडोर करीब 1.18 किलोमीटर लंबा है। इसके शुरू होने से केदारनाथ जाने वाले एनएच-107 और बदरीनाथ जाने वाले एनएच-07 के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा।

अभी चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में वाहनों के रुद्रप्रयाग बाजार से गुजरने के कारण शहर में यातायात का दबाव बढ़ जाता है। नए मार्ग के नियमित रूप से चालू होने के बाद तीर्थयात्रियों के वाहनों को बाजार क्षेत्र से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। इससे स्थानीय लोगों के साथ ही चारधाम यात्रियों को भी जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास चारधाम यात्रा के मार्गों को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाना है। उन्होंने कहा कि सड़क और परिवहन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार का सीधा लाभ यात्रियों के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन प्रभावित हिस्सों में चल रहे ढलान सुरक्षा और स्थिरीकरण कार्यों की भी जानकारी ली। इन कार्यों का उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा कम करना और यात्रा मार्ग को अधिक सुरक्षित बनाए रखना है।

2,500 से ज्यादा किताबों से समृद्ध हुई संगम लाइब्रेरी

रुद्रप्रयाग दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन के ‘एक पुस्तक दान करें, ज्ञान का वृक्ष लगाएं’ अभियान के तहत संचालित संगम लाइब्रेरी का भी अवलोकन किया। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की पहल से शुरू किए गए इस अभियान के जरिए पुस्तकालय में विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अध्ययन सामग्री जुटाई जा रही है।

अभियान को जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम लोगों का सहयोग मिल रहा है। अब तक लाइब्रेरी को 2,500 से अधिक किताबें मिल चुकी हैं। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, सामान्य ज्ञान, साहित्य और अन्य विषयों से संबंधित पुस्तकें शामिल हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अभियान के तहत 150 पुस्तकें उपलब्ध कराई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तकालय केवल किताबें रखने की जगह नहीं, बल्कि युवाओं के ज्ञान और व्यक्तित्व निर्माण के केंद्र होते हैं। उन्होंने पुस्तक दान अभियान की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक सहयोग से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की ऐसी पहल उन विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है।

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि अभियान के माध्यम से जुटाई गई पुस्तकों का उपयोग विद्यार्थियों और अन्य पाठकों के लिए किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य जनसहभागिता के जरिए पुस्तकालय को ऐसा केंद्र बनाना है, जहां युवाओं को अध्ययन और ज्ञानवर्धन के लिए बेहतर माहौल मिल सके।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी, बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कप्रवान, सीमांत क्षेत्र अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष चंडी प्रसाद भट्ट, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

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21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन का देहरादून में शुभारंभ, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और सतत विकास पर मंथन https://janprtinidhi.com/ucost-2/ https://janprtinidhi.com/ucost-2/#respond Sun, 25 Oct 2026 14:21:50 +0000 https://janprtinidhi.com/?p=10143 देहरादून। उत्तराखंड में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC-2026) का शनिवार, 25 अक्टूबर को विज्ञान धाम, देहरादून में शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी प्रगति, नवाचार और राज्य की क्षेत्रीय चुनौतियों के वैज्ञानिक समाधान पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन का आयोजन उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया।

विज्ञान और तकनीक को समाज की जरूरतों से जोड़ने पर जोर

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं की पहचान कर उनके वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान खोजने की दिशा में काम करने की जरूरत है। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग, अनुसंधान और नवाचार को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ने पर जोर दिया।

यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति-2026 के प्रमुख उद्देश्यों और विज्ञान, अनुसंधान तथा नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों के बीच समन्वय, ज्ञान के आदान-प्रदान और शोध को सामाजिक आवश्यकताओं से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रो. पंत ने ‘विज्ञान सेतु’ पहल की जानकारी देते हुए कहा कि इस तरह की पहल विज्ञान और समाज के बीच संवाद बढ़ाने तथा वैज्ञानिक ज्ञान एवं उपलब्धियों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

महोत्सव के पहले दिन 260 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत

सम्मेलन के पहले दिन 13 तकनीकी प्रभागों में 260 से अधिक शोध-पत्र मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रस्तुत किए गए। इनमें कृषि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान एवं वानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, जैव रसायन एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान, रासायनिक विज्ञान, भू-विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं पदार्थ विज्ञान, नैनो प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य एवं पोषण, गणित एवं सांख्यिकी, कंप्यूटर विज्ञान और उभरती प्रौद्योगिकियां, चिकित्सा एवं औषध विज्ञान, भौतिक विज्ञान, ग्रामीण विज्ञान, प्राणी विज्ञान एवं पशुपालन जैसे विषय शामिल रहे। सम्मेलन में ‘वर्ष का सर्वश्रेष्ठ नवाचारकर्ता’ (Innovator of the Year) श्रेणी को भी शामिल किया गया है।

हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों पर भी फोकस

USSTC-2026 में उभरती प्रौद्योगिकियों, अंतर्विषयक अनुसंधान और नवाचार आधारित विकास के साथ उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। पर्यावरण, कृषि, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सतत विकास से जुड़े मुद्दों के समाधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। सम्मेलन में अनुसंधान को राज्य की विकास प्राथमिकताओं और समाज की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

‘विकसित भारत, सशक्त उत्तराखंड 2047’ पर चर्चा

उद्घाटन सत्र के दौरान ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (STI) नीति : विकसित भारत, सशक्त उत्तराखंड 2047’ विषय पर विचार-मंथन सत्र आयोजित किया गया। इसमें राज्य के विकास में अनुसंधान की भूमिका, वैज्ञानिक उपलब्धियों को विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने और विज्ञान-तकनीक एवं नवाचार की भावी दिशा पर चर्चा हुई।

इसके अलावा विज्ञान संचार तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों और पत्रकारों ने विज्ञान को सरल एवं जनसुलभ तरीके से आम लोगों तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका पर विचार रखे।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग का भी आयोजन

सम्मेलन के तहत द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग का आयोजन भी किया गया। इसमें कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी मुख्य अतिथि रहे। आयोजन का उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि और वैज्ञानिक गतिविधियों में सहभागिता बढ़ाना है।

इसके साथ ही ‘लैब ऑन व्हील्स’ अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके माध्यम से वैज्ञानिक प्रयोगों और गतिविधियों को विद्यार्थियों तथा आम लोगों तक पहुंचाने और वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

60 से अधिक संस्थानों और स्टार्टअप्स की प्रदर्शनी

सम्मेलन परिसर में 60 से अधिक वैज्ञानिक एवं शिक्षण संस्थानों तथा स्टार्टअप्स की ओर से प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें वैज्ञानिक उपलब्धियों, शोध परियोजनाओं, तकनीकी नवाचारों और उद्यमशीलता से जुड़े प्रयासों को प्रदर्शित किया गया।

प्रदर्शनी शोधकर्ताओं, नवाचारकर्ताओं और विभिन्न संस्थानों को अपने काम को प्रस्तुत करने, विचार साझा करने और संभावित सहयोग के अवसर तलाशने का मंच भी प्रदान कर रही है।

पहले दिन करीब 1,000 प्रतिभागियों की रही भागीदारी

आयोजकों के मुताबिक सम्मेलन में करीब 1,000 शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, नवाचारकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, उद्यमियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

सम्मेलन का उद्देश्य उत्तराखंड में वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ ही शिक्षा, शोध, शासन, उद्योग और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। यूकॉस्ट की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक परिषद शोध एवं विकास परियोजनाओं, प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण, पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान शिक्षा और सामाजिक पहुंच से जुड़े कार्यक्रमों पर भी काम करती है।

 

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EPFO उत्तरी अंचल फुटबॉल टूर्नामेंटः उत्तराखंड ने हिमाचल को 6-0 से रौंदा, फाइनल में उत्तराखंड और नई दिल्ली https://janprtinidhi.com/epfo-football-tournament/ https://janprtinidhi.com/epfo-football-tournament/#respond Sat, 24 Oct 2026 15:19:32 +0000 https://janprtinidhi.com/?p=10137 देहरादून। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तत्वावधान में आयोजित उत्तरी अंचल फुटबॉल टूर्नामेंट 2026-27 का उद्घाटन समारोह 24 अक्टूबर 2026 को देहरादून में हुआ। टूर्नामेंट में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और मुख्यालय (नई दिल्ली) की चार टीमें हिस्सा ले रही हैं।

टूर्नामेंट की अध्यक्षता क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-I वीर विक्रम बहादुर सिंह कर रहे हैं। उद्घाटन समारोह में सीबीआई के उप महानिरीक्षक (DIG) मनीष जी. सुरती मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

उत्तराखंड की हिमाचल प्रदेश पर शानदार जीत

टूर्नामेंट के पहले दौर में टीमों का निर्धारण ड्रॉ के माध्यम से किया गया था। ड्रॉ के मुताबिक पंजाब और मुख्यालय (नई दिल्ली) के बीच पहला मुकाबला तथा उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच दूसरा मुकाबला खेला गया।

मुख्यालय (नई दिल्ली) की टीम ने पंजाब को 1-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। नई दिल्ली के सौरभ को मैन ऑफ द मैच चुना गया। वहीं, दूसरे मुकाबले में उत्तराखंड की टीम ने अपने मुकाबले में हिमाचल प्रदेश को 6-0 से करारी शिकस्त दी। इस मुकाबले में सुधीर चौहान को मैन ऑफ द मैच चुना गया। इस तरह उत्तराखंड और मुख्यालय (नई दिल्ली) की टीमें अब खिताबी मुकाबले में आमने-सामने होंगी।

25 अक्टूबर को खेला जाएगा फाइनल मुकाबला

टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला 25 अक्टूबर 2026 को खेला जाएगा, जिसमें उत्तराखंड और मुख्यालय (नई दिल्ली) की टीमें खिताब के लिए भिड़ेंगी। आयोजन के दौरान भविष्य निधि कार्यालय, देहरादून के कर्मचारियों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। आयोजकों के अनुसार टूर्नामेंट का उद्देश्य कर्मचारियों के बीच खेल भावना, अनुशासन, टीम भावना और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देना है।

 

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Dehradun Roller Skating Championship: 14-15 नवंबर को होगी 26वीं उत्तराखंड राज्य चैंपियनशिप, राष्ट्रीय चयन भी होगा https://janprtinidhi.com/dehradun-roller-skating-championship/ https://janprtinidhi.com/dehradun-roller-skating-championship/#respond Fri, 23 Oct 2026 13:38:57 +0000 https://janprtinidhi.com/?p=10129 देहरादून। उत्तराखंड में रोलर स्केटिंग खिलाड़ियों के लिए बड़ी प्रतियोगिता का आयोजन होने जा रहा है। उत्तराखंड रोलर स्केटिंग एसोसिएशन की ओर से 14 और 15 नवंबर 2026 को देहरादून के रोलर स्केटिंग रिंक प्लेग्राउंड में 26वीं उत्तराखंड राज्य रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप आयोजित की जाएगी। यह प्रतियोगिता 64वीं RSFI राष्ट्रीय रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप 2026 के लिए खिलाड़ियों के चयन का भी मंच होगी।

एसोसिएशन के मुताबिक प्रतियोगिता में रोलर स्केटिंग की अलग-अलग विधाओं के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। इनमें स्पीड स्केटिंग, ट्रैक रेसिंग, आर्टिस्टिक स्केटिंग, रोलर हॉकी, इनलाइन फ्रीस्टाइल और स्केटबोर्डिंग जैसी विधाएं शामिल हैं। राष्ट्रीय चयन के लिए खिलाड़ियों को RSFI के निर्धारित पंजीकरण और संबंधित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

25 अक्टूबर तक RSFI रजिस्ट्रेशन

एसोसिएशन ने खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, स्कूलों और स्केटिंग अकादमियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण कराने की अपील की है।

महत्वपूर्ण तारीखें इस प्रकार हैं—

  • RSFI पंजीकरण की अंतिम तिथि: 25 अक्टूबर 2026
  • राज्य प्रतियोगिता में प्रवेश की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर 2026
  • राज्य चैंपियनशिप: 14 और 15 नवंबर 2026
  • स्थान: रोलर स्केटिंग रिंक प्लेग्राउंड, देहरादून

खिलाड़ियों को अपनी संबंधित विधा के अनुसार निर्धारित स्केट्स और आवश्यक उपकरणों के साथ प्रतियोगिता में उपस्थित होना होगा।

31 अक्टूबर-1 नवंबर की प्रतियोगिता को लेकर जनहित अपील

वहीं, उत्तराखंड रोलर स्केटिंग एसोसिएशन ने 31 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक सरकारी परेड ग्राउंड, देहरादून में प्रस्तावित ओपन स्टेट रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप और अन्य रोलर स्केटिंग प्रतियोगिताओं को लेकर एक विशेष जनहित अपील भी जारी की है।

एसोसिएशन ने इन प्रतियोगिताओं के संबंध में आयोजक संस्थाओं की पंजीकरण स्थिति, आधिकारिक मान्यता, संबद्धता और आयोजन की सरकारी अनुमति की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता जताई है।

एसोसिएशन का कहना है कि स्कूलों और अभिभावकों को प्रतियोगिता की वास्तविक मान्यता, चयन प्रक्रिया और प्रतियोगिता से मिलने वाले प्रमाण-पत्रों की स्वीकार्यता के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।

मेडल और प्रमाण-पत्रों को लेकर पारदर्शिता की मांग

एसोसिएशन ने यह भी चिंता जताई है कि केवल मेडल वितरण, फोटो सेशन या प्रचार के माध्यम से स्कूलों की भागीदारी का इस्तेमाल प्रचारात्मक उद्देश्यों के लिए किए जाने की आशंका को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

इसके साथ ही संगठन ने प्रति खिलाड़ी लिए जाने वाले शुल्क और वित्तीय पारदर्शिता की जांच की मांग की है। एसोसिएशन ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या किसी निजी अकादमी या संस्था को राज्य प्रतिनिधित्व अथवा खिलाड़ियों के चयन का दावा करने का अधिकार है।

खेल विभाग से जांच और दिशा-निर्देश जारी करने की मांग

उत्तराखंड रोलर स्केटिंग एसोसिएशन ने खेल विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही स्कूलों, खिलाड़ियों और अभिभावकों के हित में उचित दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।

एसोसिएशन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 14-15 नवंबर को होने वाली राज्य चैंपियनशिप जहां उत्तराखंड के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच देगी, वहीं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए चयन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगी। ऐसे में खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों के लिए प्रतियोगिता की मान्यता, पंजीकरण और चयन प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी अहम रहेगी।

 

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