देहरादून। जमीन किसकी थी, किसके नाम पहुंची और हस्तांतरण के पीछे दस्तावेज असली हैं या उनमें कोई खेल हुआ—गढ़वाल मंडल में भूमि विवाद और कथित फर्जीवाड़े के ऐसे मामलों की अब तह तक जांच होगी। प्रशासन ने साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर वर्षों पुराने खसरा-खतौनी, नक्शे और रजिस्ट्री तक निकाली जाएंगी। सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों को भी प्राथमिकता से जांच के दायरे में लाया जाएगा।
गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में देहरादून के ईसी रोड स्थित आयुक्त शिविर कार्यालय में हुई लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में 56 प्रकरणों को समीक्षा के लिए रखा गया। इनमें 12 मामलों का निस्तारण कर दिया गया। आठ मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने और एक प्रकरण में एसआईटी जांच के निर्देश दिए गए। बाकी 35 मामलों की विस्तृत पड़ताल कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
बैठक में देहरादून, हरिद्वार और पौड़ी समेत अलग-अलग क्षेत्रों से आए ऐसे प्रकरणों पर चर्चा हुई, जिनमें सरकारी जमीन पर कब्जे, संदिग्ध भूमि हस्तांतरण, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और बिना अनुमति प्लॉटिंग जैसी शिकायतें शामिल हैं।
70 बीघा जमीन दूसरे नामों पर कैसे हुई ट्रांसफर?
देहरादून के भारूवाला क्षेत्र की करीब 70 बीघा जमीन का मामला बैठक के प्रमुख प्रकरणों में रहा। यह भूमि एंग्लो इंडियन एवं डोमिसाइल समिति से संबंधित बताई गई है और इसके दूसरे व्यक्तियों के नाम हस्तांतरित होने की जांच की जाएगी।
आयुक्त ने अधिकारियों से केवल भूमि रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि संबंधित समिति के नियमों को भी जांचने को कहा है। समिति का अधिनियम हासिल कर उसके बायलॉज का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद देखा जाएगा कि जमीन को दूसरे नामों पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया किन नियमों के तहत और किस तरह पूरी की गई।
राजपुर रोड की जमीन पर नगर निगम से मांगा पूरा हिसाब
देहरादून के राजपुर रोड स्थित बहुउद्देशीय वित्तीय विकास निगम की भूमि का मामला भी समिति के सामने आया। इस प्रकरण में नगर निगम से जमीन का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है।
नगर निगम को उपलब्ध अभिलेखों और अन्य संबंधित विवरण के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी।
ग्रामसभा की जमीन पर उगी फसल भी जांच के दायरे में
हरिद्वार के बहादराबाद में ग्रामसभा की भूमि पर खेती किए जाने का मामला सामने आने पर आयुक्त ने पूछा है कि आखिर सरकारी जमीन पर खेती करने की अनुमति किसके निर्देश पर दी गई।
अब अधिकारियों को इसकी जांच करनी होगी। इसके साथ संबंधित भूमि पर खड़ी फसल को नियमानुसार कुर्क करने की कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
‘केसर हिंद’ के नाम दर्ज जमीन कैसे हुई ट्रांसफर?
हरिद्वार का एक और भूमि प्रकरण प्रशासन की जांच में आया है। यहां ‘केसर हिंद’ के नाम दर्ज भूमि के दूसरे लोगों के नाम चले जाने के मामले में हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाएगी।
अधिकारियों को जमीन से संबंधित पुराने और वर्तमान रिकॉर्ड के साथ हस्तांतरण में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।
कनखल में प्रॉपर्टी डीलर पर FIR के निर्देश
हरिद्वार के कनखल में सामने आए लैंड फ्रॉड के एक मामले में संबंधित प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
आयुक्त ने कहा कि भूमि धोखाधड़ी में किसी की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। पुलिस से भी कहा गया है कि लैंड फ्रॉड की तहरीर मिलने पर मामले को गंभीरता से लिया जाए। प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनने की स्थिति में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाए।
कोटद्वार में प्लॉटिंग और ज्यादा जमीन बेचने की शिकायत
पौड़ी जिले के कोटद्वार में बिना अनुमति प्लॉटिंग का प्रकरण भी बैठक में पहुंचा। शिकायत में निर्धारित हिस्से से अधिक जमीन बेचे जाने का मामला भी शामिल है।
संबंधित अधिकारियों को दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति का पता लगाने और तथ्यात्मक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
नए रिकॉर्ड से नहीं खुले राज तो पुराने दस्तावेज भी निकलेंगे
लैंड फ्रॉड के मामलों की जांच का तरीका भी सख्त करने को कहा गया है। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि केवल वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड देखकर जांच पूरी नहीं मानी जाएगी।
भूमि के स्वामित्व या हस्तांतरण पर सवाल होने की स्थिति में पुराने खसरा-खतौनी, राजस्व नक्शे, रजिस्ट्री और अन्य संबंधित अभिलेखों की पूरी श्रृंखला देखी जाएगी। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि जमीन मूल रूप से किसके नाम थी और बाद के वर्षों में उसमें क्या-क्या बदलाव हुए।
सरकारी जमीन की शिकायतों पर पहले कार्रवाई
सरकारी भूमि पर कब्जे और अतिक्रमण को लेकर प्रशासन ने अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। एसडीएम, तहसीलदार, नगर निगम और नगर निकायों को ऐसी शिकायतों की प्राथमिकता से जांच करनी होगी।
किसी सरकारी जमीन पर फर्जीवाड़ा या अवैध कब्जा मिलने पर संबंधित विभागों को अलग-अलग कार्रवाई करने के बजाय समन्वय के साथ कदम उठाने को कहा गया है।
राजस्व और पुलिस विभाग को भी भूमि धोखाधड़ी के मामलों में मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत के अनुसार एमडीडीए, नगर निकाय और दूसरे विभागों को भी जांच में शामिल किया जाएगा।
बैठक में वन संरक्षक कल्याणी, नगर आयुक्त ऋषिकेश विजय नाथ शुक्ला, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण स्वतंत्र कुमार, एसडीएम सदर अपूर्वा सिंह, एसडीएम विकासनगर विनोद कुमार, एसडीएम डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल, एसडीएम ऋषिकेश कुमकुम जोशी और जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व नितिन वशिष्ठ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। गढ़वाल मंडल के अन्य जिलों से अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े।






