Friday, September 25, 2026
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Tehri Lake Master Plan: टिहरी झील के लिए बनेगा नया टूरिज्म ब्लूप्रिंट, 8000 हेक्टेयर में तय होगा कहां और कैसे हो विकास

देहरादून। उत्तराखंड की टिहरी झील को दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों की कतार में लाने के लिए अब उसके आसपास होने वाले विकास की पूरी तस्वीर पहले कागज पर तैयार की जाएगी। झील और उसके आसपास करीब 8000 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए मास्टर प्लान और जोनल प्लान बनाने की तैयारी है। इसमें यह तय किया जाएगा कि किस इलाके में किस तरह की पर्यटन गतिविधि विकसित की जा सकती है और कहां निर्माण व दूसरी गतिविधियों को नियंत्रित रखने की जरूरत है।

सरकार की योजना टिहरी को केवल झील और वाटर स्पोर्ट्स के लिए पहचाने जाने वाले पर्यटन स्थल से आगे ले जाने की है। यहां ऐसा टूरिज्म मॉडल तैयार करने पर काम होगा, जिसमें पर्यटक सुबह आएं और शाम को लौटने के बजाय एक-दो दिन या उससे अधिक समय टिहरी में बिताएं।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में पर्यटन विभाग की बैठक में टिहरी लेक एरिया के भविष्य को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा की। उन्होंने ‘वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ की अवधारणा के तहत झील क्षेत्र के लिए लंबी अवधि की विकास योजना तैयार करने को कहा।

पहले तय होगा कहां क्या बनेगा

टिहरी झील के आसपास पर्यटन बढ़ने के साथ अनियोजित निर्माण की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए शुरुआत से ही भूमि उपयोग और विकास का स्वरूप तय किया जाएगा। प्रस्तावित प्लान में लगभग 8000 हेक्टेयर क्षेत्र की सरकारी और निजी दोनों तरह की जमीन शामिल होगी।

अलग-अलग इलाकों की क्षमता और जरूरत के आधार पर जोन बनाए जाएंगे। किसी क्षेत्र को पर्यटन गतिविधियों के लिए विकसित किया जा सकता है तो किसी को पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित रखने की जरूरत हो सकती है। इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखकर पूरे इलाके का खाका तैयार होगा।

योजना बनाने से पहले स्थानीय जरूरतों और भौगोलिक परिस्थितियों को समझने के लिए संबंधित पक्षों से बातचीत करने के निर्देश भी दिए गए हैं। तकनीकी स्तर पर स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली और भोपाल की विशेषज्ञता लेने की संभावना भी देखी जाएगी।

टिहरी आने की नहीं, यहां रुकने की वजह तैयार होगी

नई योजना का बड़ा फोकस पर्यटकों का स्टे बढ़ाने पर है। इसके लिए झील के आसपास कुछ ऐसे प्रमुख पर्यटन केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव है, जो अपने आप में आकर्षण बन सकें। इन्हें ‘मैगनेट एरिया’ के रूप में विकसित करने की बात कही गई है।

पर्यटन सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। पहले उन परियोजनाओं और क्षेत्रों पर काम होगा, जिनमें पर्यटकों को आकर्षित करने की ज्यादा क्षमता है। इसके बाद अगले चरण में दूसरे क्षेत्रों और गतिविधियों को जोड़ा जाएगा।

झील से निकलकर पहाड़ और गांव तक पहुंचेगा पर्यटन

टिहरी की नई पर्यटन योजना में पानी के साथ पहाड़ और गांव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। झील में चलने वाली गतिविधियों के अलावा आसपास नए ट्रैकिंग रूट और ट्रेल्स विकसित करने की तैयारी है।

एडवेंचर और नेचर टूरिज्म को भी इसका हिस्सा बनाया जाएगा। इसके साथ आसपास बसे गांवों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की योजना है।

पर्यटकों के लिए ऐसे विलेज और कल्चरल टूर तैयार किए जा सकते हैं, जिनमें उन्हें स्थानीय लोगों की जीवनशैली, खान-पान, परंपराओं और संस्कृति को समझने का मौका मिले। इससे पर्यटन से होने वाली आमदनी का हिस्सा आसपास के गांवों तक पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार व स्वरोजगार बढ़ाने की कोशिश होगी।

गर्मियों में झील का पानी घटे तब भी नहीं थमेगा पर्यटन

टिहरी के सामने सबसे अहम सवालों में से एक झील के जलस्तर में मौसम के साथ होने वाला बदलाव है। खासकर अप्रैल, मई और जून में पानी कम होने पर वाटर बेस्ड गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

इसी वजह से इन महीनों के लिए ऐसे विकल्प तैयार करने को कहा गया है, जिनका झील के जलस्तर से सीधा संबंध न हो। ट्रैकिंग, गांवों की सैर, संस्कृति और प्रकृति आधारित गतिविधियां इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

पूरे साल के लिए मौसम और जलस्तर के अनुसार अलग-अलग पर्यटन गतिविधियों का कैलेंडर बनाने की भी योजना है। इससे टिहरी को केवल कुछ महीनों के बजाय सालभर सक्रिय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कोशिश होगी।

अलग-अलग हिस्सों में बनेंगे आकर्षण के केंद्र

करीब 8000 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र को एक ही तरह विकसित करने के बजाय अलग-अलग हिस्सों की खासियत के अनुसार पर्यटन केंद्र बनाने की योजना है। इन्हीं क्षेत्रों को प्रमुख आकर्षण या ‘मैगनेट एरिया’ के रूप में पहचान दी जाएगी।

इस मॉडल में कहीं एडवेंचर गतिविधियों पर जोर हो सकता है तो कहीं प्रकृति, ट्रैकिंग, संस्कृति या ग्रामीण पर्यटन मुख्य आकर्षण बन सकता है। विकास का काम भी प्राथमिकता के आधार पर अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा।

प्रधानमंत्री के सामने रखने की तैयारी

टिहरी झील को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने की योजना को आगे बढ़ाने के लिए अब विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार किया जाएगा। इसमें प्रस्तावित मास्टर प्लान, अलग-अलग पर्यटन गतिविधियां, संभावित पर्यटन केंद्र और विकास के चरणों की पूरी रूपरेखा शामिल होगी। मुख्य सचिव ने इस प्रेजेंटेशन को प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी करने को भी कहा है।

अगली बैठक में THDC के अधिकारियों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि झील और उसके आसपास के विकास से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न विभाग और एजेंसियां एक साथ चर्चा कर सकें। बैठक में सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, एपीसीसीएफ डॉ. विवेक पाण्डेय, सुरेन्द्र मेहरा, सीसीएफ प्रसन्ना कुमार पात्रो, अपर सचिव विनीत कुमार, हिमांशु खुराना, अभिषेक रोहिला और टिहरी की जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल मौजूद रहीं।

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