Thursday, July 23, 2026
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उत्तराखंड में पर्वतारोहण को नई ऊंचाई देने की कवायद, 83 प्रमुख हिमालयी चोटियां अभियानों के लिए खुलीं

देहरादून।  उत्तराखंड सरकार ने साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पर्वतारोहण को नई दिशा देने का काम किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर गढ़वाल और कुमाऊं हिमालय क्षेत्र की 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए खोल दिया है। यह फैसला उत्तराखंड को वैश्विक पर्वतारोहण मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

विश्व प्रसिद्ध हिमालयी शिखर शामिल

पर्वतारोहण के लिए खोली गई चोटियों की ऊंचाई 5,700 मीटर से लेकर 7,756 मीटर तक है। इनमें कामेट, नंदा देवी ईस्ट, चौखंबा और त्रिशूल समूह, शिवलिंग, सतोपंथ, चंगाबांग, पंचचूली और नीलकंठ जैसी विश्व प्रसिद्ध चोटियां शामिल हैं। ये पर्वत शिखर अपनी तकनीकी कठिनाइयों, प्राकृतिक सौंदर्य और हिमालय की विराटता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाते हैं।

मुख्यमंत्री धामी का बड़ा विज़न

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालय उत्तराखंड की पहचान, विरासत और आत्मा है। 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण के लिए खोलना राज्य के साहसिक पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को साहसिक गतिविधियों से जोड़ना, स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित विकास सुनिश्चित करना है।

भारतीय पर्वतारोहियों को बड़ी राहत

राज्य सरकार के इस निर्णय से भारतीय पर्वतारोहियों को बड़ी राहत मिली है। अधिसूचित 83 चोटियों पर अब भारतीय पर्वतारोहियों से किसी भी प्रकार का अभियान शुल्क नहीं लिया जाएगा। पहले यह शुल्क भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन और वन विभाग द्वारा वसूला जाता था, लेकिन अब राज्य सरकार स्वयं इसका भार उठाएगी। इससे आर्थिक कारणों से पर्वतारोहण से दूर रहने वाले युवाओं को आगे बढ़ने का बड़ा अवसर मिलेगा।

विदेशी पर्वतारोहियों के लिए भी आसान राह

विदेशी पर्वतारोहियों के लिए भी नियमों को सरल बनाया गया है। राज्य स्तर पर लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क को समाप्त कर दिया गया है। अब विदेशी पर्वतारोहियों को केवल भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन द्वारा निर्धारित शुल्क ही देना होगा। इससे उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण क्षमता बढ़ेगी और विदेशी अभियानों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है।

डिजिटल अनुमति प्रणाली से आएगी तेजी

पर्वतारोहण अभियानों के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है। अब सभी आवेदन उत्तराखंड माउंटेनियरिंग परमिशन सिस्टम के माध्यम से किए जाएंगे। यह डिजिटल प्रणाली पारदर्शी, तेज और सुगम है, जिससे अनुमति प्रक्रिया में देरी की समस्या समाप्त होगी।

रोजगार व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति

इस फैसले से सीमावर्ती और दूर-दराज क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी। स्थानीय लोगों को गाइड, पोर्टर, होमस्टे, परिवहन और अन्य सेवाओं के माध्यम से रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पलायन रोकने में भी सहायक सिद्ध होगी।

सुरक्षा और पर्यावरण सर्वोपरिः सरकार

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पर्वतारोहण अभियानों में सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य होगा। पर्वतारोहियों को “लीव नो ट्रेस” सिद्धांत अपनाना होगा, ताकि हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी सुरक्षित रह सके।

केंद्रीय बजट से मिला योजना को बल

गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में पहाड़ी राज्यों के पर्यटन को बढ़ावा देने की घोषणा की है। बजट में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पर्यावरण-अनुकूल पर्वतीय ट्रेल्स विकसित करने का ऐलान किया गया है। यह कदम भारत को विश्व स्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग गंतव्य बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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