Thursday, July 23, 2026
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उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में अहम बैठक, स्वास्थ्य कर्मियों के जनपद परिवर्तन, ग्रीन हाइड्रोजन नीति को मंजूरी

देहरादून। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आज आयोजित उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में राज्य के प्रशासनिक, औद्योगिक, ऊर्जा, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट के इन फैसलों को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, निवेश को बढ़ावा, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन की दिशा में अहम माना जा रहा है।

कैबिनेट ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के स्वास्थ्य कार्यकर्ता और स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को बड़ी राहत देते हुए उनके मूल संवर्ग में न्यूनतम पांच वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी कर चुके कर्मियों को पूरे सेवाकाल में एक बार आपसी समझ के आधार पर जनपद परिवर्तन की अनुमति देने को स्वीकृति दी है। इस निर्णय से लंबे समय से स्थानांतरण की मांग कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को लाभ मिलेगा और सेवाओं के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी।

बैठक में राज्य में लघु, मध्यम और वृहद परियोजनाओं के लिए भू-स्वामियों से आपसी समझौते के आधार पर भूमि प्राप्त करने की प्रक्रिया तय करने का निर्णय भी लिया गया। सरकार का मानना है कि भूमि अर्जन अधिनियम, 2013 के तहत लंबी और जटिल प्रक्रिया के कारण परियोजनाओं में देरी होती है। नई प्रक्रिया से मुकदमेबाजी में कमी आएगी, परियोजनाओं की लागत घटेगी और जनहित की योजनाओं को समय पर पूरा करने में सहायता मिलेगी।

औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में कैबिनेट ने उधमसिंहनगर जिले के प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक आस्थान के रूप में विकसित करने के लिए सिडकुल को हस्तांतरित किए जाने से संबंधित शासनादेश में संशोधन को मंजूरी दी। संशोधन के तहत औद्योगिक विकास विभाग और राजस्व विभाग की सहमति से समान प्रयोजन के लिए भूमि को उप-पट्टे पर देने का अधिकार भी प्रदान किया गया है, जिससे औद्योगिक निवेश को और गति मिलने की उम्मीद है।

जनजाति बहुल जिलों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कैबिनेट ने जनजाति कल्याण विभाग के ढांचे के पुनर्गठन से जुड़े निर्णय को भी स्वीकृति दी। देहरादून, चमोली, उधमसिंहनगर और पिथौरागढ़ में चार जिला जनजाति कल्याण अधिकारियों के पद सृजित किए गए हैं। इन पदों को सेवा नियमावली में शामिल करने के लिए उत्तराखंड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली, 2025 के प्रख्यापन को मंजूरी दी गई।

जल संरक्षण और भू-जल के नियंत्रित उपयोग को लेकर कैबिनेट ने गैर-कृषिकारी उपयोग के लिए भू-जल निकास पर जल मूल्य और प्रभार की दरें तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया। यह दरें उद्योगों, रेजीडेंशियल अपार्टमेंट, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी, होटल, वॉटर एम्यूजमेंट पार्क, वाहन धुलाई केंद्र और स्वीमिंग पूल जैसे व्यावसायिक उपयोगों पर लागू होंगी। इसके तहत वाणिज्यिक, औद्योगिक, अवसंरचनात्मक और रेजीडेंशियल परियोजनाओं के लिए पांच हजार रुपये पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राज्य को शिक्षा हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए कैबिनेट ने देहरादून में “जी.आर.डी. उत्तराखंड विश्वविद्यालय” नाम से निजी विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी। प्रस्तावित विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा में नवाचार, आधुनिक अध्यापन पद्धतियों को बढ़ावा, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को शिक्षा उपलब्ध कराना और रोजगार के अवसर सृजित करना बताया गया है।

सामरिक और नागरिक उड्डयन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कैबिनेट ने उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ और चमोली के गौचर हवाई पट्टियों को एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के रूप में संयुक्त नागरिक एवं सैन्य संचालन हेतु रक्षा मंत्रालय को लीज पर हस्तांतरित करने पर सहमति दी। इससे सीमावर्ती और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

बैठक में राज्य के ऊर्जा भविष्य से जुड़े एक बड़े फैसले के तहत “उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026” के प्रख्यापन को भी मंजूरी दी गई। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन नीति और मिशन के अनुरूप यह नीति राज्य में स्वच्छ और हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगी। जल विद्युत जैसे प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन से न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, बल्कि रोजगार और निवेश के नए अवसर भी सृजित होंगे।

कुल मिलाकर, आज की कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों को उत्तराखंड के सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण, औद्योगिक विस्तार और सामाजिक कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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