Sunday, March 15, 2026
Home फीचर केजरीवाल क्यों टारगेट में सर्वाधिक?

केजरीवाल क्यों टारगेट में सर्वाधिक?

हरिशंकर व्यास
संदेह नहीं है कि मोदी-शाह के नंबर एक टारगेट पर अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी है। वजह क्या? तात्कालिक कारण लोकसभा चुनाव की भाजपा रणनीति है। जबकि मूल कारण केजरीवाल की वह इमेज है, जिससे वे नरेंद्र मोदी की बराबरी में अपने को ईमानदार, राष्ट्रवादी, भारत माता के भक्त, विकास, गरीबों के भले, रेवडिय़ों की जुमलेबाजी करते आए हैं। अरविंद केजरीवाल को भी अभिनय, भाव-भंगिमा, जुमलों और झूठ से लोगों का बहकाना, भक्त बनाना आता है। केजरीवाल भी मध्य वर्ग, गरीब और पढ़े-लिखों सभी में यह धारणा बनवा लेते हैं कि केजरीवाल है तो मुमकिन है। मामूली बात नहीं है जो उन्होंने अपने जादू से 12 साल में आम आदमी पार्टी का राष्ट्रीय दर्जा बनवा लिया। दिल्ली के बाद पंजाब में सरकार बनाई तो गुजरात से लेकर हरियाणा आदि राज्यों में चाल, चेहरे, चरित्र का हल्ला और वोट बनाए।

उस नाते छह महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव पर सोचें। मोदी-शाह की पहली प्राथमिकता क्या है? सर्वोच्च प्राथमिकता हिंदी भाषी प्रदेशों में, उत्तर भारत में भाजपा 2019 जितनी सीटें जीते। इसमें एक बड़ा खतरा कांग्रेस व आप के एलायंस का है। यदि इन्होंने एलायंस में चुनाव लड़ा तो दिल्ली (सात सीट), पंजाब (13), हरियाणा (11), चंडीगढ़ (एक), हिमाचल प्रदेश (चार) याकि कुल 36 लोकसभा सीटों पर भाजपा को कड़ी लड़ाई लडऩी होगी। पंजाब में न उसे और न उसकी सहयोगी किसी पार्टी को सीट मिलेगी। वही हरियाणा में भाजपा की गैर-जाट वोटों की राजनीति में केजरीवाल के वैश्य-मध्य वर्ग वोटों से मुश्किल होगी। ऐसा ही दिल्ली में होना है। मतलब इन 36 सीटों पर कांग्रेस व आप का एलायंस एक और एक ग्यारह होता है। यदि ये दोनों पार्टियां मिल कर 15-18  सीटें भी जीत जाएं तो भाजपा का गणित गड़बड़ा जाएगा।

इसलिए न केवल 2024 के लोकसभा चुनाव, बल्कि बाद के हरियाणा के चुनावों के तकाजे में भी जरूरी है कि येन केन प्रकारेण अरविंद केजरीवाल को दागी बता जेल में रखा जाए। लोगों के दिल-दिमाग से केजरीवाल की ईमानदार इमेज पर लगातार हथौड़े चला कर उसे ऐसा बना दिया जाए जिससे बनियों-मध्य वर्ग-गरीब की वोट बैंक राजनीति में वे बदनाम हो जाएं और यह धारणा बने कि आप अब खत्म।

दरअसल राहुल गांधी को पप्पू बनाना और अरविंद केजरीवाल को भ्रष्ट बनाना एक ही रणनीति के दो पहलू हैं। कम उम्र के राहुल और केजरीवाल (हेमंत और तेजस्वी को भी इस श्रेणी में रख सकते है। इसलिए इन पर भी ईडी-सीबीआई की मार) भविष्य में क्योंकि खतरा होंगे तो वक्त रहते इन्हें ऐसा पप्पू व भ्रष्ट करार दो ताकि लोगों के जहन में ये नाम कभी स्वीकार्य ही न हों। देश के लिए प्रधानमंत्री चुनने का जब भी सवाल आए तो लोग यह कहते हुए राहुल गांधी को नकारें कि तो क्या पप्पू को प्रधानमंत्री बनाएं या तिहाड़ में बंद अरविंद केजरीवाल को?

सचमुच हिसाब लगाएं तो मोदी-शाह-भाजपा और भक्तों की मीडिया टीम और मीडिया नैरेटिव में नौ सालों में जिस पैमाने पर राहुल गांधी को पप्पू व केजरीवाल को भ्रष्ट बनाने का जैसा मनोवैज्ञानिक अभियान चला है वैसा भारत के इतिहास में केवल एक ही बार पहले देखने को मिला है। वह अभियान था नरेंद्र मोदी को ‘मौत का सौदागर’ साबित करने का।
और देखिए, अब नरेंद्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री अपने विरोधियों को खत्म करने के लिए कांग्रेसियों, सेकुलरों, वामपंथियों से भी अधिक बेशर्म तौर-तरीकों से किसी को पप्पू बनवा दे रहे हैं तो किसी को भ्रष्ट तो किसी को देशद्रोही।

सो, केजरीवाल का लोकसभा चुनाव के वक्त जेल में होना लगभग तय है। आम आदमी पार्टी चुनाव लडऩे लायक नहीं रहेगी। दिल्ली-पंजाब के कांग्रेसी नेता भी आप को खत्म करार दे एलायंस में ना नुकुर करेंगे। संभव है ईडी आप पार्टी को ही कथित शराब घोटाले में लिप्त करार दे उसके अकाउंट को फ्रीज करने जैसे अचानक ऐसे एक्स्ट्रिम दांव चले, जिससे चुनाव लडऩा ही संभव नहीं रहे।

सवाल है क्या अरविंद केजरीवाल उससे पहले सरेंडर नहीं हो जाएंगे? कईयों का मानना है कि केजरीवाल का सरेंडर कराना, उनकी राजनीति को मायावती, अखिलेश यादव जैसा बनवाना भाजपा का मकसद हो सकता है। राघव चड्ढा या एक्सवाईजेड के जरिए आरएसएस-मोदी-शाह से परोक्ष बात कर पार्टी रहम पा सकती है। इंडिया एलायंस के भीतर विभीषण के रोल को अपना सकती है!

यों राजनीति में असंभव कुछ नहीं है। बावजूद इसके असल बात यह है कि मोदी-शाह के राजनीतिक रोडमैप में जहां केजरीवाल भविष्य का खतरा हैं वही प्रधानमंत्री मोदी पिछले नौ वर्षों में केजरीवाल से मिले अनुभवों को भी नहीं भूल सकते हैं। तभी केजरीवाल और उनकी सरकार के खिलाफ हर वह काम हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ। मुख्यमंत्री, राज्य और सरकार के अधिकार तक घटा दिए गए।

RELATED ARTICLES

विकास के दावों के बीच भूख की त्रासदी झेलने के लिए लोग मजबूर

 विश्‍वनाथ झा यह अपने आप में एक बड़ा विरोधाभास है कि जिस दौर में दुनिया भर में अर्थव्यवस्था के चमकते आंकड़ों के जरिए लगातार विकास...

 बोतलबंद पानी नहीं, जहर पी रहे हैं हम  

ज्ञानेन्द्र रावत आधुनिक जीवनशैली के तहत हम सभी अपने जीवन को सुखमय बनाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास कर रहे हैं। वह चाहे भौतिक सुख...

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली 81.1 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित

गीता यादव गर्भवती महिलाओं पर किए एक अध्ययन से पता चला है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली 81.1 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

रसोई गैस और ईंधन की कालाबाजारी पर कड़ी निगरानी रख रही सरकार, तीन दिनों में 280 जगह किया निरीक्षण

देहरादून। प्रदेश में एलपीजी और अन्य ईंधन की उपलब्धता तथा वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले...

UTTARAKHAND BUDGET: 1.11 लाख करोड़ का बजट पेश, गरीब-युवा-किसान और महिलाओं पर फोकस

गैरसैंण/देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का वार्षिक बजट प्रस्तुत किया।...

अर्थव्यवस्था में उत्तराखंड की ऊंची छलांग, जीडीपी डेढ़ गुना बढ़ी, प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी

देहरादून। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में तेजी का दौर जारी है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹3,81,889 करोड़ पहुंच गया है,...

उत्तरांचल प्रेस क्लब में रंगारंग होली मिलन महोत्सव की धूम, रंगों की फुहार और लोक संगीत की गूंज में सरोबार हुए लोग

देहरादून। देहरादून में उत्तरांचल प्रेस क्लब का होली मिलन समारोह इस बार खास उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित हुआ। रंगों की फुहार, लोक...

Recent Comments